भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 326, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंबागडोर सँभालनी है, उनका असर है और उनके ही द्वारा शुरू हुआ आन्दोलन
'भारत-युवा संघ' इस समय युवाओं में विशेष प्रभाव रखता है। उनके विचार
बिल्कुल अलग ढंग के हैं। उनके विचार एक ही शब्द में बताये जा सकते हैं -
“वापस वेदों की ओर लौट चलो।” (बैक टु वेद्स)। यह आवाज़ सबसे पहले
आर्यसमाज ने उठायी थी। इस विचार का आधार इस आस्था में है कि वेदों में
परमात्मा ने संसार का सारा ज्ञान उँडेल दिया है। इससे आगे और अधिक विकास
नहीं हो सकता। इसलिए हमारे हिन्दुस्तान ने चौतरफ़ा जो प्रगति कर ली थी उससे
आगे न दुनिया बढ़ी है और न बढ़ सकती है! ख़ैर, वासवानी आदि इसी आस्था
को मानते हैं। तभी एक जगह कहते हैं -
“हमारी राजनीति ने अब तक कभी तो मैजिनी और वाल्टेयर को अपना आदर्श
मानकर उदाहरण स्थापित किये हैं और या कभी लेनिन और टालस्टाय से सबक
सीखा। हालाँकि उन्हें ज्ञात होना चाहिए कि उनके पास उनसे कहीं बड़े आदर्श हमारे
पुराने ऋषि हैं।” वे इस बात पर यक़ीन करते हैं कि हमारा देश एक बार तो विकास
की अन्तिम सीमा तक जा चुका था और आज हमें आगे कहीं भी जाने की
आवश्यकता नहीं, बल्कि पीछे लौटने की ज़रूरत है।
आप एक कवि हैं। कवित्व आपके विचारों में सभी जगह नज़र आता है। साथ
ही यह धर्म के बहुत बड़े उपासक हैं। यह 'शक्ति' धर्म चलाना चाहते हैं। यह कहते
हैं, “इस समय हमें शक्ति की अत्यन्त आवश्यकता है।” वह 'शक्ति' शब्द का अर्थ
केवल भारत के लिए इस्तेमाल नहीं करते। लेकिन उनको इस शब्द से एक प्रकार
की देवी का, एक विशेष ईश्वरीय प्राप्ति का विश्वास है। वे एक बहुत भावुक कवि
की तरह कहते हैं :
"For in solitude have communicated with her, our admired Bharat
Mata, And my aching head had heard voices saying...'The day of free-
dom is not far off.'... Sometimes indeed a strange feeling visits me and
I say to myself-Holly, holy is Hindustan. For still is she under the pro-
tection of her mighty Rishis and their beauty is around us, but we behold
it not."
अर्थात् एकान्त में भारत की आवाज़ मैंने सुनी है। मेरे दुखी मन ने कई बार
यह आवाज़ सुनी है कि 'आज़ादी का दिन दूर नहीं'...कभी-कभी बहुत अजीब
विचार मेरे मन में आते हैं और मैं कह उठता हूँ, हमारा हिन्दुस्तान पाक और पवित्र
है, क्योंकि पुराने ऋषि उसकी रक्षा कर रहे हैं और उनकी ख़ूबसूरती हिन्दुस्तान के
पास है। लेकिन हम उन्हें देख नहीं सकते।
यह कवि का विलाप है कि वह पागलों या दीवानों की तरह कहते रहते हैं
: “हमारी माता बड़ी महान है। बहुत शक्तिशाली है। उसे परास्त करने वाला कौन
पैदा हुआ है।” इस तरह वे केवल मात्र भावुकता की बातें करते हुए कह जाते हैं
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