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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 325, कुल 788 में से

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नये नेताओं के अलग-अलग विचार
(जुलाई, 1928 के ‘किरती’ में छपे इस लेख में भगतसिंह ने सुभाषचन्द्र बोस
और जवाहरलाल नेहरू के विचारों की तुलना की है। बाद में इतिहास ने भगतसिंह
के इन विचारों की पुष्टि की। – स.)
असहयोग आन्दोलन की असफलता के बाद जनता में बहुत निराशा और मायूसी
फैली। हिन्दू-मुस्लिम झगड़ों ने बचा-खुचा साहस भी खत्म कर डाला। लेकिन देश
में जब एक बार जागृति फैल जाये तब देश ज़्यादा दिन तक सोया नहीं रह सकता।
कुछ ही दिनों बाद जनता बहुत जोश के साथ उठती तथा हमला बोलती है। आज
हिन्दुस्तान में फिर जान आ गयी है। हिन्दुस्तान फिर जाग रहा है। देखने में तो कोई
बड़ा जन-आन्दोलन नज़र नहीं आता लेकिन नींव ज़रूर मज़बूत की जा रही है।
आधुनिक विचारों के अनेक नये नेता सामने आ रहे हैं। इस बार नौजवान नेता ही
आगे बढ़े और देश में नौजवानों के ही आन्दोलन चल रहे हैं। नौजवान नेता ही
देशभक्त लोगों की नज़रों में आ रहे हैं। बड़े-बड़े नेता बड़े होने के बावजूद एक
तरह से पीछे छोड़े जा रहे हैं। इस समय जो नेता आगे आये हैं वे हैं – बंगाल के
पूजनीय श्री सुभाषचन्द्र बोस और माननीय पण्डित श्री जवाहरलाल नेहरू। यही दो
नेता हिन्दुस्तान में उभरते नज़र आ रहे हैं और युवाओं के आन्दोलनों में विशेष रूप
से भाग ले रहे हैं। दोनों ही हिन्दुस्तान की आज़ादी के कट्टर समर्थक हैं। दोनों ही
समझदार और सच्चे देशभक्त हैं। लेकिन फिर भी इनके विचारों में ज़मीन-आसमान
का अन्तर है। एक को भारत की प्राचीन संस्कृति का उपासक कहा जाता है तो
दूसरे को पक्का पश्चिम का शिष्य। एक को कोमल हृदय वाला भावुक कहा जाता
है और दूसरे को पक्का युगान्तकारी। हम इस लेख में उनके अलग-अलग विचारों
को जनता के समक्ष रखेंगे, ताकि जनता स्वयं उनके अन्तर को समझ सके और
स्वयं भी विचार कर सके। लेकिन उन दोनों के विचारों का उल्लेख करने से पूर्व
एक और व्यक्ति का उल्लेख करना भी ज़रूरी है जोकि इन्हीं की भाँति स्वतन्त्रता
प्रेमी है और युवा-आन्दोलनों की एक विशेष शख्सियत है। साधू वासवानी जो चाहे
कांग्रेस के बड़े नेताओं की भाँति जाने-माने तो नहीं, चाहे देश के राजनीतिक क्षेत्र
में उनका कोई विशेष स्थान तो नहीं, तो भी युवाओं पर, जिन्हें कि कल देश की
नौजवान भारत सभा और राष्ट्रीय नेतृत्व का मूल्यांकन / 319