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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 295, कुल 788 में से

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नेहरू समिति की रिपोर्ट

हिन्दुस्तान भी अजब देश है। यहाँ के नेता भी अजीबो-ग़रीब हैं। बैठे-ठाले विचार
किया कि चलो एक संविधान ही तैयार कर लें कि हम हिन्दुस्तान में कैसा राज
चाहते हैं। तुरन्त सर्वदलीय कॉन्फ़्रेंस बुलायी गयी, जिसमें नेहरू समिति बनायी गयी
कि वह एक रिपोर्ट तैयार करे। रिपोर्ट तैयार हो गयी और प्रकाशित भी की गयी।
बड़ी प्रशंसा हो रही है, बड़ी श्लाघा हो रही है। तारीफ़ों के पुल बाँधे जा रहे हैं।
रिपोर्ट का अर्थ क्या है? क्या हमें भी सरकार कनाडा, आस्ट्रेलिया और आयरलैण्ड
जैसा राज दे दे? बहुत खूब! वायसराय अंग्रेज़ होगा जो काफ़ी अधिकार सम्पन्न
होगा। लेकिन चुनाव से ही कौंसिल और असेम्बली में सदस्य भेजे जायेंगे और चुनाव
में मत देने का अधिकार बालिग व्यक्तियों को ही होगा। सदन में वे स्वयं कुछ नहीं
कर सकेंगे। केवल वायसराय की उँगलियों पर नाचेंगे।
ऐसा लगता है कि वे कनाडा और आयरलैण्ड आदि के संविधान खोलकर और
सामने रखकर बैठ गये और यह रिपोर्ट लिख दी। लेकिन समस्या यह है कि यह रिपोर्ट
लिखी क्यों गयी? जब असहयोग आन्दोलन ज़ोरों पर था, उस समय बाबू भगवानदास
आदि ज़ोर-शोर से अपनी बातें उठाते रहे, लेकिन किसी ने स्वराज्य की व्याख्या करने
की आवश्यकता न समझी। पर आज जबकि कोई आन्दोलन भी नहीं है, संविधान
तैयार करके रख दिया गया है। आख़िर इसका क्या कारण है? असल में बात यह है
कि कुछ लोगों का विचार है कि साइमन कमीशन बना है तो यह ज़रूर कुछ न कुछ
देने के लिए ही बना है। और अब सरकार आने वाली जंग और अन्य देशों की
स्थितियों को सामने रखती हुई हिन्दुस्तान को कुछ न कुछ देने को तैयार है। कमीशन
का बहिष्कार तो इसलिए किया जा रहा है कि मिशन में कोई हिन्दुस्तानी सदस्य नहीं
है, और तो कोई बात नहीं। और अब सीधे नहीं बल्कि यों ही दूसरी तरह से कमीशन
को बताना चाहते हैं कि हम यह कुछ लेना चाहते हैं। एक सज्जन ने अच्छा उदाहरण
दिया कि एक फ़कीर ने अपनी लम्बी लाठी से एक लोटा बाँध लिया और कहने
लगा – मुझे भीख नहीं चाहिए, मेरे लोटे को दे दो! हमारे उग्र नेताओं की यह स्थिति
है। ये सभी समझे बैठे हैं कि अब कुछ न कुछ मिलकर ही रहेगा। इसलिए बता दें
कि हम क्या लेना चाहते हैं। अक्ल के अन्धे नेता आयरलैण्ड के समान अधिकार तो

विविध सामाजिक-राजनीतिक प्रश्न : कुशाग्र विश्लेषक दृष्टि / 289