सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 292, कुल 788 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 292

रूप में काम करेगी और श्रमिक किसान पार्टी को नियन्त्रण में कर प्रचार का
काम खुले रूप में किया जायेगा, आदि। उधर क्योंकि रूस चाहता है कि
दुनियाभर में मज़दूरों का शासन स्थापित किये बग़ैर स्थायी शान्ति नहीं हो
सकती, इसीलिए वह हर जगह समाजवादी आन्दोलन करवाना चाहता है। और
चूँकि दुनिया में सबसे बड़े पूँजीपति और सम्राटपसन्द अंग्रेज़ हैं, इसलिए उनका
राज नष्ट करना ज़रूरी है और उनका राज ही हिन्दुस्तान के सिर पर है, इसीलिए
यहाँ क्रान्ति करवाना अनिवार्य है। ऐसी स्थिति में अंग्रेज़ रूस से बहुत भयभीत
हैं और वे कम्युनिस्ट या समाजवादी विचारों के प्रचार को रोकना चाहते हैं। पर
किया क्या जाये? हिन्दुस्तानी पूँजीपतियों की सहानुभूति जीतने के लिए वह पत्र
छपवाया गया। अख़बारों में लिखा गया था –
दिल्ली, अगस्त 20
निम्न पत्र को प्रसारित किया गया।
किसकी ओर से, कब, कहाँ? यह कुछ पता नहीं। और यह पत्र है भी पिछले
दिसम्बर की तारीख़ का। अब तक वह कहाँ छिपा रहा?
कम्युनिस्ट पार्टी ने इस पत्र के साथ अपना कोई सम्बन्ध मानने से इन्कार कर
दिया है। श्रमिक किसान पार्टी ने भी ऐसी ही घोषणा की है। फिर यह पत्र आया
कहाँ से? और इसे अब ही क्यों छापा गया? ये बातें सोचने योग्य हैं। इस पत्र के
साथ, और रूस की कुछ घोषणाओं को बार-बार छापने से हिन्दी पूँजीपतियों को
भी सरकार ने अपने साथ मिला लिया। हमें पता है कि निठल्ले पूँजीपति मिलकर
यह बिल पास करवा लेंगे। पर क्या सरकार समझती है कि इस तरह समाजवादी
विचारों का प्रचार रुक जायेगा? क्या इन नीचताभरी चालों से वे अपने पैर पक्के
कर स्थिर रह सकेंगे? इतिहास की ओर से जान-बूझकर क्यों आँखें बन्द रखी जाती
हैं? आज फ्रांस के फ़्यूडल लॉर्ड्स और रूसी नोबल्स कहाँ है? क्या इन लोगों ने
इन विचारों को दबाने के लिए अपना-अपना ज़ोर नहीं लगाया और क्या क्रान्ति रुक
सकी थी? फिर यहीं क्रान्ति कैसे रुक सकेगी? जब तक भूख है और श्रम करने
वाले भूखे मरते रहेंगे और निठल्ले बैठने वाले हर तरह की मौज़ उड़ाते रहेंगे, तब
तक समाजवादी विचार दबाने से और भी ज़ोर पकड़ते रहेंगे। लेकिन श्रमिकों को
संभल जाना चाहिए और समझ लेना चाहिए कि उनके आन्दोलन को दबाने के लिए
कितने अत्याचार किये जा रहे हैं और यदि वे अब भी न संभले तो बाद में पछताने
से कुछ हाथ न आयेगा।
286 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़