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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 291, कुल 788 में से

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श्रमिक आन्दोलन को दबाने की चालें

सितम्बर, 1928 के 'किरती' के चार और सम्पादकीय महत्त्वपूर्ण हैं। एक
पब्लिक सेफ़्टी बिल, दूसरा ट्रेड डिस्प्यूट बिल सम्बन्धी भगतसिंह और उनके साथियों
के विचारों को प्रकट करता है। इन्हीं बिलों के विरोध में भगतसिंह और बटुकेश्वर
दत्त ने 8 अप्रैल, 1929 को असेम्बली हॉल में बम का धमाका किया था। तीसरी
सम्पादकीय टिप्पणी में मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट पर चर्चा है और इसे बुर्जु‌आ विचारधारा
का प्रतीक बताया गया है। चौथे सम्पादकीय में बारदोली किसान आन्दोलन पर विचार
रखे गये हैं। सितम्बर, 1928 में ही हिन्दुस्तान प्रजातान्त्रिक पार्टी, हिन्दुस्तान समाजवादी
प्रजातान्त्रिक पार्टी बन गयी थी। – स.
विश्व में जो अन्धेरगर्दी इन खुदग़र्ज़ और बेईमान पूँजीपति शासकों ने मचा रखी है, वह
लिखकर लोगों को समझायी नहीं जा सकती। अब जब उनके पर्दे दुनिया में खुल रहे
हैं और अब जब श्रमिक भी इन लोगों को अपने श्रम पर हराम की मोटी-मोटी खाल
चढ़ाने से रोकने का यत्न करने लगे हैं तो ये तड़पते हैं और शान्ति-शान्ति का शोर
मचाने लगते हैं। सम्पत्ति खतरे में है, दुनिया कैसे चलेगी, आदि वाक्यों से शोर मचाकर
आम लोगों और श्रमिकों को समाजवादी आन्दोलन के विरोधी बना रहे हैं। साथ ही
साथ उन आन्दोलनों को दबाने के विचार से अन्धा अत्याचार करने की ठान ली है।
आज हम समाचारपत्रों में पढ़ रहे हैं कि लोगों की सुरक्षा नाम का एक (Public
Safety—removed from India-bill) बिल असेम्बली में पेश हो रहा है। पेश सरकार
की ओर से ही होना है। बिल का आशय यह है कि यदि समाजवादी विचारों का प्रचार
करने वाला कोई ऐसा आदमी भारत में आ जायेगा, जो यहाँ का नागरिक न होगा तो
उसे नोटिस देकर एकदम देश से निकाल दिया जायेगा। यह बिल क्यों पास किया
जायेगा और इसे पास करवाने के लिए क्या-क्या घटिया चालें चली जा रही हैं, यही
हम पाठकों को बताना चाहते हैं।
कुछ दिन पहले अख़बारों में एक पत्र छपा था जिसके बारे में कहा जाता
था कि कम्युनिस्टों की ओर से यह पत्र इंग्लैण्ड की कम्युनिस्ट पार्टी को लिखा
गया था। उसमें उन्होंने कहा था कि आख़िर में हम सशस्त्र क्रान्ति या हथियारों
से युद्ध कर ही क्रान्ति सम्पन्न करेंगे, लेकिन उससे पहले कम्युनिस्ट पार्टी गुप्त
विविध सामाजिक-राजनीतिक प्रश्न : कुशाग्र विश्लेषक दृष्टि / 285