भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
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शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 290, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंयदि नौजवान हथेलियों पर सिर रखकर बिना किसी स्वार्थ के समाज को अच्छा
बनाने के लिए बलिदान न करते तो सरकारों से जितने अधिकार अभी तक छीने
जा चुके हैं, उतने भी न छीने जा सकते।
1925 में विपिनचन्द्र पाल ने एक लेख में लिखा था कि “यह पोलिटिकल
क़ातिल ही थे, जिन्होंने कि मिण्टो-मारले योजना के लिए रास्ता साफ़ किया।” एक
और माडरेट एस.आर. दास ने लिखा था कि “इंग्लिस्तान को इस मीठी नींद से
जगाने के लिए कि हिन्दुस्तान के साथ ‘अच्छा सलूक’ हो रहा है, एक बम की
ज़रूरत थी।”
यों आमतौर पर नेता लोग इन षड्यन्त्रकारियों के ख़िलाफ़ ही रहा करते हैं तो
भी हमारे नेता साहिब बब्बर अकाली दल की तारीफ़ यह कहकर किया करते हैं
कि सिखों को गुरुद्वारा बिल इसी आन्दोलन ने दिलवाया है, नहीं तो गुरुद्वारा बिल
कभी भी न मिलता।
यह लेख लिखने से न तो हमारा यह आशय है कि बम फेंकने की प्रेरणा दी
जाये और न ही यह कि षड्यन्त्रकारियों की तारीफ़ के बड़े-बड़े पुल बाँध दिये
जायें, चाहे हम समझते हैं कि वे सच्चे देशभक्त होते हैं और अपने भीतर सच्ची
राष्ट्रीय और देशभक्ति की स्पिरिट रखते हैं और अपने विश्वासों के अनुसार काम
करते हैं, वे इसी में देश और क़ौम की बेहतरी समझते हैं। इस लेख को लिखने
का आशय तो यह है कि जनता को यह बताया जाये कि जहाँ भी गुलामी और
ग़रीबी मौजूद है वहाँ कुछ जोशीले लोग उठते ही रहेंगे और गुलामी और ग़रीबी के
जुए को उतार फेंकने के यत्न करते रहेंगे, चाहे वे सफल हों या नहीं। हम समझते
हैं कि इतिहास हमें यही बताता है कि इन षड्यन्त्रों को रोकने और हमेशा के लिए
ख़त्म करने का एक ही तरीक़ा है कि दुनिया से ग़रीबी और गुलामी दूर की जाये
और प्रत्येक देश में आज़ादी के साथ रोटी के सवाल का भी पूरा समाधान हो। जब
तक यह नहीं होता, षड्यन्त्रों का बन्द होना मुश्किल है।
284 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़