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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 26, कुल 788 में से

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पृष्ठ 26

और इसीलिए हम भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़ों का
यह संकलन प्रस्तुत कर रहे हैं।
इस संकलन में वे सभी दस्तावेज़ शामिल हैं जो 1986 में जगमोहन सिंह और
चमनलाल सम्पादित संकलन के पहले संस्करण में हैं। वे तीन दस्तावेज़ भी इसमें
हैं जिन्हें सम्पादक-द्वय ने 1991 में प्रकाशित संकलन के दूसरे संस्करण में शामिल
किया था। इनके अतिरिक्त इसमें एक और पत्र शामिल किया गया है जो ‘महारथी’
पत्रिका (दिल्ली) के सम्पादक के नाम भगतसिंह ने लाहौर से 27 फ़रवरी 1928
को लिखा था। यह पत्र भगतसिंह के सबसे छोटे भाई कुलतार सिंह के सौजन्य से
कुछ ही वर्षों पहले प्रकाश में आया है। इसे चमनलाल द्वारा सम्पादित और 2004
में प्रकाशित ‘भगतसिंह के सम्पूर्ण दस्तावेज़’ में शामिल किया गया है। चमनलाल
द्वारा सम्पादित इस नये संकलन में जेल नोटबुक और डॉन ब्रीन की आयरिश
स्वतन्त्रता संग्राम विषयक पुस्तक के भगतसिंह द्वारा किये गये अनुवाद के अतिरिक्त
भगतसिंह के कुल 72 दस्तावेज़ों को शामिल किया गया है, लेकिन उनके साथियों
के शेष सैंतीस दस्तावेज़ों को इनमें नहीं रखा गया है। हाँ, परिशिष्ट के रूप में दो
दस्तावेज़ अवश्य दिये गये हैं — पहला, नौजवान भारत सभा का घोषणापत्र और
दूसरा एच.एस.आर.ए. का घोषणापत्र। अब इस संकलन में हम डॉन ब्रीन की पुस्तक
के भगतसिंह द्वारा किये गये अनुवाद और उनकी जेल नोटबुक के (विश्वनाथ मिश्र
द्वारा किये गये और सत्यम वर्मा द्वारा सम्पादित) हिन्दी अनुवाद के साथ ही,
भगतसिंह और उनके साथियों के सभी 108 उपलब्ध दस्तावेज़ों को पहली बार एक
साथ प्रकाशित कर रहे हैं। संकलन को एक सन्दर्भ-ग्रन्थ के रूप में सापेक्षिक
सम्पूर्णता प्रदान करने के लिए जेल नोटबुक के बारे में सम्पादक सत्यम वर्मा की
भूमिका तथा आलोक रंजन और मित्रोखिन के उन लेखों को भी (क्रमशः प्रस्तावना
और परिशिष्ट के रूप में) हमने इस संकलन में शामिल कर लिया है, जो जेल
नोटबुक के हिन्दी अनुवाद के साथ 1999 में परिकल्पना से प्रकाशित हुए थे। इस
भूमिका के अतिरिक्त इस संकलन की प्रस्तावना के रूप में भगतसिंह के साथी
क्रान्तिकारी शिव वर्मा के सुप्रसिद्ध लेख ‘क्रान्तिकारी आन्दोलन का वैचारिक
विकास’ हम यहाँ एक बार फिर प्रकाशित कर रहे हैं। यह कई बार, कई जगह
प्रकाशित हो चुका है, लेकिन यहाँ फिर इसे देने का कारण इसके ऐतिहासिक
मूल्यांकन की वस्तुपरकता के अतिरिक्त यह भी है कि इसे भगतसिंह के एक साथी
ने लिखा है जो आजीवन कम्युनिस्ट आन्दोलन में सक्रिय रहा और जिसने पश्चदृष्टि
से देखकर क्रान्तिकारी आन्दोलन का मूल्यांकन करते हुए अपने अनुभवों के
अतिरिक्त अन्य आवश्यक ऐतिहासिक सन्दर्भ-स्रोतों की भी सहायता ली है।
क्रान्तिकारी आन्दोलन का मूल्यांकन करने वाले लेखों में आज भी इसे सर्वाधिक
वैज्ञानिक दृष्टि-सम्पन्न माना जाता है। दूसरे स्थान पर, इसी विषय पर केन्द्रित
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