भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 25, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंक्रान्तिकारियों पर आधारित एक कम्युनिस्ट पार्टी और उसके नेतृत्व वाली जन-सेना
तथा किसानों-मज़दूरों के जन-संगठन बनाने की बात लिखी थी, कांग्रेसी नेतृत्व के
बुर्जुआ चरित्र का कुशाग्र विश्लेषण किया था और कांग्रेस के नेतृत्व में आज़ादी
मिलने की स्थिति में पैदा होने वाली परिस्थितियों का प्रतिभाशाली पूर्वानुमान प्रस्तुत
किया था? बहुत कम लोग जानते हैं कि भगतसिंह अपनी विचारयात्रा के अन्तिम
चरण तक एक कट्टर नास्तिक और अकुण्ठ द्वन्द्वात्मक भौतिकवादी बन चुके थे।
बहुत लोग जानते हैं कि उन्होंने जेल में मार्क्स, एंगेल्स, लेनिन आदि की प्रतिनिधि
क्लासिकी कृतियों के अतिरिक्त जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, गोर्की, अप्टन सिंक्लेयर, जैक
लण्डन आदि की रचनाओं तथा फ्रांसीसी क्रान्ति से लेकर रूसी क्रान्ति तक के
इतिहास का विशद् अध्ययन किया था और इस अध्ययन से निर्मित इतिहास-दृष्टि
के सहारे भारत के राष्ट्रीय आन्दोलन के बारे में आवश्यक एवं बहुमूल्य निष्कर्ष
निकाले थे। बहुत कम लोग अभी भी इस तथ्य से परिचित हैं कि भगतसिंह का
लक्ष्य साम्राज्यवाद और सामन्तवाद से मुक्ति-मात्र नहीं था। राष्ट्रीय जनवाद के संघर्ष
को वह समाजवादी क्रान्ति की दिशा में यात्रा का एक मुकाम मानते थे और अपने
चिन्तन के अन्तिम चरण में राष्ट्रीय जनवाद के संघर्ष में भी मज़दूरों-किसानों की
लामबन्दी तथा सर्वहारा वर्ग के विचारधारात्मक-राजनीतिक वर्चस्व को सर्वोपरि
महत्त्व देने लगे थे। क्या यह निहायत ज़रूरी नहीं है कि इन सच्चाइयों से इस देश
की व्यापक जनता को, विशेषकर उन करोड़ों जागरूक, विद्रोही, सम्भावना-सम्पन्न
युवाओं को परिचित कराया जाये, जिनके कन्धों पर भविष्य-निर्माण का कठिन
ऐतिहासिक दायित्व है? यदि भगतसिंह और उनके साथियों के वैचारिक पक्ष से
पढ़े-लिखे लोगों का बहुलांश भी परिचित होता तो यह कदापि सम्भव नहीं होता
कि भाजपा और आर.एस.एस. के धार्मिक कट्टरपन्थी फ़ासिस्ट भी उन्हें अपने
नायक के रूप में प्रस्तुत करने की कुटिल कोशिश करते!
जनता के इतिहास की इस गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुँचाने का
काम जन-मुक्ति संघर्ष के वैचारिक-सांस्कृतिक मोर्चे पर सन्नद्ध सेनानी ही कर
सकते हैं। सरकारी इतिहासकारों और अकादमिक प्रतिष्ठानों से यह अपेक्षा की ही
नहीं जा सकती। इस वर्ष भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु और चन्द्रशेखर आज़ाद की
शहादत के पचहत्तर वर्ष पूरे हो रहे हैं। 2007-2008 भगतसिंह का जन्म शताब्दी
वर्ष होगा। इन तीन वर्षों के दौरान देश के कुछ छात्र-युवा संगठनों, बुद्धिजीवियों और
संस्कृतिकर्मियों ने देशभर में स्मृति-संकल्प यात्रा निकालकर भगतसिंह और उनके
साथियों के विचारों और उनकी प्रासंगिकता से देश के जन-जन को परिचित कराने
का, भगतसिंह की जनमुक्ति की अवधारणा को साकार करने का तथा उनकी स्मृति
से प्रेरणा व विचारों से दिशा लेकर नयी समाजवादी क्रान्ति का सन्देश पूरे देश में
फैलाने का संकल्प लिया है। राहुल फ़ाउण्डेशन भी इस संकल्प का सहभागी है
भगतसिंह की वैचारिक विरासत और हमारा समय / 19