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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 238, कुल 788 में से

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पृष्ठ 238

ग़दर आन्दोलन की कुछ व्यथा
सितम्बर, 1927 के ‘किरती’ में एक बहुत महत्त्वपूर्ण लेख ‘ग़दर लहर की कुछ
व्यथा’ छपा था। यह एक अख़बार से लेकर छापा गया था। लेखन-शैली और विचारों
से यह लेख शहीद भगवतीचरण वोहरा का हो सकता है। – स.
पहले मैं यह बता दूँ कि विप्लववाद का क्या अर्थ है। फिर मैं आगे चलूँगा। हर
गिरी हुई क़ौम हमेशा गिरी नहीं रहती और उस क़ौम के वीर उसकी उन्नति का
यत्न करते हैं और कुर्बानियाँ देते हैं, और अब यह सोचना है कि कुर्बानियाँ कई
तरह से दी जाती हैं। क़ौमों को उठाने का यत्न भी कई-कई तरीक़ों और हिम्मत
से किया जाता है। एक तो देश में शिक्षा का प्रचार करना। यह भी कोई छोटी-सी
बात नहीं। दूसरे, लोगों को उनके हक़ बताने और उन्हें हासिल करने के लिए
सरकार के आगे प्रार्थना करना। उसे (ऐसे दल को) हम माडरेट कहते हैं। यह
शब्द उस समय इस्तेमाल होता है, जब देश उस स्थिति से कुछ ऊपर उठ जाता
है। दूसरा दर्जा होता है गर्म दल का, जिस तरह 1907 में लोकमान्य तिलक जी
की पार्टी थी या आजकल महात्मा गाँधीजी का प्रचार कहा जा सकता है। लेकिन
जिस समय इन दोनों रास्तों पर चलने से भी सफलता नहीं मिलती तो तेज़
नौजवानों का एक दल कुछ और आगे बढ़ता है। वह हाथोहाथ काम करना चाहता
है, मरना और मारना चाहता है और इस ढंग से ही जीत प्राप्त करना चाहता है।
उसे (ऐसे लोगों को) अंग्रेज़ी भाषा में रिवल्यूशनरीज़ (Revolutionaries) कहते
हैं। इस रूप में वे गुप्त काम करते हैं और बाद में बदलकर खुल्लमखुल्ला
लड़ाई करने को तैयार हो जाते हैं, जिस तरह कि आयरलैण्ड वाले अब तक
लड़ते रहे हैं। यह काम जब तक गुप्त रहता है, तब तक उसे दबाने का यत्न
किया जाता है। इस स्थिति में उन्हें हिन्दुस्तानी भाषा में विप्लववादी कहते हैं,
उर्दू में इन्क़लाबी कहा जाता है। यह शब्द इज़्ज़त और निन्दा, दोनों के लिए
इस्तेमाल हो सकता है, अर्थात जब तक देश कमज़ोर है, तब तक वहाँ खुशामदी
अधिक होते हैं, तब तक वहाँ उन्हें सभी लोग बुरा कहते हैं और शासक तो उनके
दुश्मन होते ही हैं, लेकिन बाद में उन्हें ही देशभक्त कहा जाता है।
हम किसी डर के कारण चाहे उन्हें बुरा कहें, लेकिन वास्तव में वे किसी से
232 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़