भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 237, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंटूटेगी और कौन-सी सत्ता में आयेगी, इस बात का पता तो अनुभव और भविष्य
ही बतायेगा।
यदि यह बिल पास हो गया तो मज़दूर फिर उन्हीं ज़ंजीरों में जकड़े जायेंगे
जिनमें से कि यत्न से अभी वे निकले ही थे। फिर उन ज़ंजीरों को तोड़ना आसान
नहीं होगा। इसलिए श्रमिकों को अब वक़्त सँभालना चाहिए और ऐसा ज़ोरदार
आन्दोलन करना चाहिए कि इस पूँजीपति गुट को, जो अभी मज़दूरों को गुलामी से
छूटने नहीं देना चाहता, नानी याद आ जाये। पर यह नानी भी तभी याद आ सकती
है, यदि आने वाली संसद में इनकी ऐसी हार हो कि याद कर-कर आँखें मला
करें। इस समय संसद में इन पूँजीपतियों का बहुमत है। इस बहुमत के अभियान
में ही ये लोग अकड़े फिर रहे हैं और मज़दूरों को नज़रों में भी नहीं लाते।
हम चाहते हैं कि मज़दूर नाम मात्र स्वतन्त्र (उदार) गुट में भी प्रचार करें और
उनमें से बहुत-से सदस्यों को अपनी ओर कर लें, ताकि यह बिल पास ही न हो
सके। और न सिर्फ़ यह बिल ही असफल करा दें वरन इस मौजूदा सरकार को
भी उलट दें। इसने यह क़ानून पेश कर राज करने के सभी अधिकार गवाँ दिये
हैं।
इस समय ज़रूरत है कि मज़दूरों के अपने घर में भी किसी तरह की फूट न
हो और मज़दूरों के नरम और गरम गुटों के सब लोग एकजुट हो जायें ताकि साझे
ज़ोर से इस मौजूदा सरकार का डटकर मुक़ाबला किया जा सके और इसे ऐसे चने
चबाये जायें कि सारी उम्र ही इस वक़्त को याद कर-कर हाथ मला करें।
विविध सामाजिक-राजनीतिक प्रश्न : कुशाग्र विश्लेषक दृष्टि / 231