भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 229, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंके सामने अदालत में मामला पेश कर सकते हैं। इनका अपना अख़बार भी होता
है। हाथ से ही लिखा जाता है। लेखक का नाम नहीं दिया जाता, लेकिन उन्हें
जेल-व्यवस्था की आलोचना करने का पूरा अधिकार है। जेलर का एक बड़ा
मज़ेदार कार्टून बना हुआ मैंने स्वयं देखा था।
कई कमरों में मैंने देखा कि क़ैदी अलग-अलग काम सीख रहे हैं। कहीं कपड़े
सीने का काम, कहीं जूता सिलने का काम और कहीं बढ़ई का काम सिखाया जा
रहा था।
और कई कमरों में पढ़ाई हो रही थी। कई मास्टर बाहर से पढ़ाने आते थे और
कई क़ैदियों में से ही थे। क़ैदी अध्यापक को प्रत्येक दो दिन की क़ैद के बदले
एक दिन की क़ैद माफ़ की जाती है।
मैं एक क़ैदी को एकान्त में ले गया। अधिकारी बड़ी खुशी से अलग हो गये।
उसने भी यही कहा कि सभी क़ैदी खुश हैं और यह जगह बहुत अच्छी है। मुझसे
पूछा गया कि इंग्लैण्ड में क़ैदियों से कैसा व्यवहार किया जाता है? उन्हें यह
विश्वास ही नहीं होता था कि इंग्लैण्ड में क़ैदियों को अलग-अलग कोठरियों में
बन्द किया जाता है और बातचीत करने की भी अनुमति नहीं होती।
वे पूछने लगे, फिर क़ैदियों की समिति क्या करती है? वह यह शिकायत दूर
क्यों नहीं करती? मैंने उन्हें बताया कि वहाँ कोई समिति नहीं बनायी जा सकती,
नहीं तो जेलर क्रोध से ही मर जायें। वे हैरान रह गये। वे विश्वास नहीं करते थे
कि जेल में क़ैदियों की समिति के बग़ैर क़ैदियों की गुज़र होती होगी।
उन्होंने यही निष्कर्ष निकाला कि मुझे अंग्रेज़ों की जेलों सम्बन्धी कुछ भी
जानकारी नहीं है। वे मुझे अपने नहाने के कमरे में ले गये। ज़ार के समय ये अँधेरी
कोठरियाँ थीं। अब वहाँ फव्वारे लगा दिये गये हैं और नहाने की बहुत अच्छी
व्यवस्था की गयी थी।
आख़िर में मैं उनके साथ लंगर (मेस) में गया। खाना बहुत सादा, बहुत बढ़िया
व स्वादिष्ट था। ऐसा बढ़िया खाना हमारे बहुत-से परिश्रम कर खाने वाले स्वतन्त्र
मज़दूर भी नहीं पा सकते। मेरे जाने से उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्होंने मुझसे इंग्लैण्ड
के क़ैदियों तक उनकी दुआ-सलाम पहुँचाने को कहा। मुझे उन्होंने अपने बग़ीचे
का गुलदस्ता भेंट किया और बड़े सम्मान के साथ विदा किया और कहा कि
उम्मीद है आप फिर आयेंगे।
अन्तरराष्ट्रीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का अध्ययन / 223