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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 230, कुल 788 में से

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पृष्ठ 230

मेरी रूस यात्रा

लेखक-भाई शौक़त उस्मानी। प्रताप कार्यालय, कानपुर से प्रकाशित। 144
पृष्ठ, मूल्य – ।।=
हिन्दुस्तान के वर्तमान जन-आन्दोलन में विदेशों की यात्रा का काफ़ी प्रभाव है।
पाठक जानते हैं कि 1914-15 के जन-आन्दोलन में अमेरिका से लौटे हुए भाइयों
ने ही अपने प्राणों की बाज़ी लगाकर एक बार हिन्दुस्तान की क़िस्मत को बदलने
का यत्न किया था।
1918 में जब ‘ख़िलाफ़त’ का मामला खड़ा हुआ तभी मुसलमान भाइयों में
हिज़रत की लहर चली – कि हमें अंग्रेज़ी मुल्क ही छोड़कर चले जाना है। इस
सिलसिले में सैकड़ों आदमी गये और बाहर जाकर उनकी आँखें खुलीं। धर्मान्ध
मुसलमानों ने देखा कि कोई भी उनका बोझ उठाने को तैयार नहीं। आख़िर बहुत-से
तो अनेक झंझट उठाकर उसी समय वापस लौट आये। कई आगे चले गये। रूस
जा पहुँचे। जिन मुसीबतों को उठाकर वे लोग गये थे वह क़िस्सा बहुत उत्साहवर्धक
है और दर्दनाक भी है। शौक़त उस्मानी उन्हीं व्यक्तियों में से हैं। तुर्किस्तान की
लड़ाइयों में से वे किस तरह जान बचाकर निकले और किस तरह रूस पहुँचे और
वहाँ की हालत देखकर अचम्भित हो उठे। ये सब बातें किताब पढ़ने से ही सम्बन्ध
रखती हैं। नौजवानों को इस किताब की ओर अवश्य ध्यान देना चाहिए और बाहर
जाकर दुनिया देखने का शौक़ पैदा करना चाहिए। रूस का बहुत अच्छा हाल लिखा
हुआ है। प्रत्येक हिन्दी पढ़े सज्जन को यह किताब मँगवाकर पढ़नी चाहिए।
224 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़