भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 22, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंपत्रिका ‘इण्डियन बुक क्रॉनिकल’ में किस्तों में शुरू किया और फिर 1994 में
इसका (अंग्रेज़ी में) पुस्तकाकार प्रकाशन हुआ। फिर अप्रैल, 1999 में इसका हिन्दी
अनुवाद (अनुवादक विश्वनाथ मिश्र और सम्पादक सत्यम वर्मा) नयी भूमिका और
नोटबुक की खोज-विषयक नये तथ्यों सहित लिखे गये दो लम्बे निबन्धों (आलोक
रंजन और एल.वी. मित्रोखिन) के साथ तथा नयी सन्दर्भ-टिप्पणियों के साथ,
परिकल्पना प्रकाशन, लखनऊ से (अब इस नोटबुक का नया हिन्दी संस्करण राहुल
फ़ाउण्डेशन से प्रकाशित हुआ है) प्रकाशित हुआ। इस नोटबुक के इस हिन्दी
संस्करण को हम दोनों प्रस्तावनामूलक निबन्धों के साथ इस संकलन में भी शामिल
कर रहे हैं। आलोक रंजन के लेख से पाठकों को भगतसिंह की जेल नोटबुक के
प्रकाश में आने की पूरी कहानी का पता चल जायेगा। पहली बार इस जेल नोटबुक
की चर्चा जी. देवल ने 1968 में ‘पीपुल्स पाथ’ नामक पत्रिका में प्रकाशित अपने
लेख में की थी। इसे उन्होंने फरीदाबाद में रह रहे भगतसिंह के छोटे भाई कुलबीर
सिंह के पास देखा था और अध्ययन करके आवश्यक नोट्स लिये थे। पुनः 1977
में रूसी विद्वान एल.वी. मित्रोखिन भारत आये और कुलबीर सिंह के पास मौजूद
नोटबुक के बारे में एक लेख लिखा जो उनकी पुस्तक ‘लेनिन एण्ड इण्डिया’ का
एक अध्याय बना। सम्भवतः आठवें दशक के अन्त में कभी नोटबुक की एक फ़ोटो
प्रतिलिपि कुलबीर सिंह के परिवार ने दिल्ली में नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम लाइब्रेरी
(तीन मूर्ति) को प्रकाशित नहीं करने की शर्त के साथ दी। 1979 के बाद इतिहास
के कई शोधार्थियों ने इसे वहाँ देखा था और अध्ययन किया था।
1986 में प्रकाशित ‘भगतसिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़’ के दूसरे
संस्करण (1991) की भूमिका में जगमोहन सिंह और चमनलाल ने भी इसका
उल्लेख किया है। इसी जेल नोटबुक की एक और फ़ोटो प्रतिलिपि डॉ. प्रकाश
चतुर्वेदी मास्को अभिलेखागार से फ़ोटो-प्रति कराकर लाये थे। नोटबुक की जिस
प्रतिलिपि को पहली बार भूपेन्द्र हूजा ने 1991 में प्रकाशित किया, वह गुरुकुल
कांगड़ी के तत्कालीन कुलपति जी.बी. कुमार हूजा को 1981 में संस्था के मुख्य
अधिष्ठाता स्वामी शक्तिवेश से प्राप्त हुई थी। नोटबुक की अभी तक प्राप्त सभी
प्रतिलिपियाँ एक-दूसरे से शब्दशः मेल खाती हैं, जिनसे इसकी आधिकारिकता की
ही पुष्टि होती है। ‘परिकल्पना प्रकाशन’ से प्रकाशित भगतसिंह की जेल नोटबुक
के हिन्दी अनुवाद का पहला संस्करण अब तक छह बार पुनर्मुद्रित हो चुका है, और
बहुत कम करके आकलन करने के बावजूद कहा जा सकता है कि पचास हज़ार
से अधिक हिन्दी पाठकों तक तो यह पुस्तक पहुँच ही चुकी है।
इस महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ के अतिरिक्त गत शताब्दी के अन्तिम दशक में
भगतसिंह और उनके साथियों पर काफ़ी कुछ प्रकाशित हुआ जिसमें हंसराज रहबर
और विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखी गयी दो जीवनियाँ भी शामिल हैं। भगतसिंह और
16 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़