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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 21, कुल 788 में से

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पृष्ठ 21

ध्यान भगतसिंह की कुशाग्र आलोचनात्मक दृष्टि और उसमें अन्तर्निहित द्वन्द्वात्मकता
की ओर आकृष्ट हुआ। इन दो लेखों ने स्पष्ट कर दिया कि अपने छोटे से जीवन
के अन्तिम कुछ वर्षों के दौरान भगतसिंह की वैज्ञानिक समाजवाद के प्रति जो
प्रतिबद्धता विकसित हुई थी, वह महज भावनात्मक या अनुभवसंगत नहीं थी,
बल्कि उसके पीछे गहन-गम्भीर अध्ययन से उपजी, सतत विकासमान वैचारिक
समझ मौजूद थी। बिपनचन्द्र के अतिरिक्त सुमित सरकार, इरफ़ान हबीब और
हरबंस मुखिया आदि कई प्रतिष्ठित इतिहासकारों ने और क्रान्तिकारी वामधारा से
जुड़े कई बुद्धिजीवियों ने भगतसिंह के वैचारिक पक्ष को रेखांकित किया।
विगत शताब्दी के अन्तिम दो दशकों के दौरान भगतसिंह और उनकी पीढ़ी के
भगवतीचरण वोहरा, सुखदेव, विजयकुमार सिन्हा, बटुकेश्वर दत्त जैसे अन्य
क्रान्तिकारियों की, क्रान्तिकारी आन्दोलन के वैचारिक विकास में भूमिका और
उसके ऐतिहासिक महत्त्व को रेखांकित करने वाली महत्त्वपूर्ण शोध-कृतियों,
जीवनियों और अब तक अनुपलब्ध दस्तावेज़ों का बड़े पैमाने पर प्रकाशन हुआ।
'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' से जुड़े वरिष्ठ क्रान्तिकारी मन्मथनाथ गुप्त
(जो क्रान्तिकारी आन्दोलन के इतिहास पर पहले भी कई महत्त्वपूर्ण पुस्तकें लिख
चुके थे) की पुस्तक 'भगतसिंह एण्ड हिज़ टाइम्स' नवें दशक के पूर्वार्द्ध में
प्रकाशित हुई। फिर इस दिशा में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण काम हुआ, और वह था
जगमोहन सिंह और चमनलाल द्वारा सम्पादित 'भगतसिंह और उनके साथियों के
दस्तावेज़' का 1986 में प्रकाशन, जिसमें कुल 105 दस्तावेज़ शामिल थे। फिर
1986 में अंग्रेज़ी में और 1987 में हिन्दी में भगतसिंह के साथी क्रान्तिकारी शिव
वर्मा के सम्पादन में भगतसिंह की चुनी हुई रचनाओं का एक और संकलन
प्रकाशित हुआ जिसमें 28 दस्तावेज़ भगतसिंह के अपने नाम से तथा परिशिष्ट के
रूप में अन्य साथियों के कुछ दस्तावेज़ और कुछ सरकारी दस्तावेज़ (कुल दस)
शामिल थे। 1986 में प्रकाशित जगमोहन सिंह और चमनलाल द्वारा सम्पादित
दस्तावेज़ों के संकलन में कुल 105 दस्तावेज़ शामिल थे जिनमें बहत्तर भगतसिंह
का लेखन हैं और शेष तैंतीस भगवतीचरण वोहरा, सुखदेव, बटुकेश्वर दत्त, महावीर
सिंह आदि साथियों का लेखन हैं। 'बम का दर्शन' शीर्षक दस्तावेज़ का पहला
मसौदा भगतसिंह ने जेल से लिखकर बाहर भिजवाया था जिसे छपवाने से पहले
अन्तिम रूप देने का काम भगवतीचरण वोहरा ने किया था। उल्लेखनीय है कि यह
दस्तावेज़ गाँधी के लेख 'कल्ट ऑफ़ दि बम' के उत्तर में लिखा गया था।
'भगतसिंह और साथियों के दस्तावेज़' के प्रकाशन के अतिरिक्त, भगतसिंह
की दुर्लभ जेल नोटबुक का प्रकाशन पिछली शताब्दी के अन्तिम दो दशकों के
दौरान की एक महत्त्वपूर्ण घटना थी। इस बहुमूल्य और इतिहास के विद्वानों तक के
लिए अज्ञात दस्तावेज़ का प्रकाशन सबसे पहले भूपेन्द्र हूजा ने 1991 में अपनी
भगतसिंह की वैचारिक विरासत और हमारा समय / 15

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