भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 218, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकई आदमी पैदा हो जायेंगे। मैं तुम्हें घृणित दृष्टि से देखता हूँ और तुम्हारी राजसत्ता को
मटियामेट कर देना चाहता हूँ। मुझे फाँसी चढ़ा दो।” खैर, इस तरह बहुत-सी घटनाएँ
होती रहीं। लेकिन एक-दो प्रसिद्ध घटनाएँ और हुईं। अमेरिका के अध्यक्ष मैकनिल पर
गोली चलायी गयी और फिर स्टील कम्पनी में हड़ताल हुई। यहाँ मज़दूरों पर जुल्म
ढाये जा रहे थे। उसके मालिक हैनरी-सी फ्रिक को अलेक्ज़ेण्डर नामक
अराजकतावादी ने गोली मारकर ज़ख़्मी कर दिया, जिसे आजीवन कैद हो गयी। खैर,
इसी तरह अमेरिका में भी अराजकतावादियों के इस विचार का प्रचार और उस पर
अमल होने लगा।
इधर यूरोप में भी अन्धेर चल रहा था। पुलिस और सरकार के साथ इन
अराजकतावादियों का झगड़ा बढ़ गया। अन्त में एक दिन वैलेण्ट नाम के एक
नवयुवक ने असेम्बली में बम फेंक दिया, लेकिन एक औरत ने उसका हाथ
पकड़कर उसे बाधा दी, परिणामस्वरूप कुछ डिप्टियों के घायल होने के अलावा
कुछ और विशेष न हुआ। उसने बड़ी बुलन्द आवाज़ में स्पष्टीकरण देते हुए कहा
– "It takes a loud voice to make the deaf hear." यानी बहरों को सुनाने के लिए
बड़ी बुलन्द आवाज़ की ज़रूरत है। अब तुम मुझे सज़ा दोगे, पर मुझे इसका कोई
भय नहीं क्योंकि मैंने तुम्हारे दिल को चोट पहुँचायी है। तुम जोकि ग़रीबों के साथ
अत्याचार करते हो और मेहनत करने वाले भूखे मरते हैं और तुम उनका ख़ून
चूस-चूसकर ऐश कर रहे हो। मैंने तुम्हें चोट मारी है। अब तुम्हारी बारी है।
उसके लिए बहुत-सी अपीलें की गयीं। सबसे ज़्यादा ज़ख़्मी हुए असेम्बली के
सदस्य ने भी जूरी से कहा कि इस पर दया की जाये, लेकिन कार्नेट नामक अध्यक्ष
की जूरी ने उनकी बातों को अस्वीकारते हुए उसे फाँसी की सज़ा दे दी। बाद में
एक इटैलियन लड़के ने एक छुरी कार्नेट के पार कर दी, जिस पर वैलेण्ट का नाम
लिखा हुआ था।
इसी तरह हद दर्जे के अत्याचारों से तंग आकर स्पेन में भी बम चले और
अन्ततः एक इटैलियन ने वजीर को मार डाला। इसी तरह यूनान के बादशाह,
आस्ट्रिया की मलिका पर भी हमले किये गये। 1900 में गैटाने ब्रैसी ने इटली के
बादशाह हर्बर्ट को मार डाला। इसी प्रकार वे लोग ग़रीबों की ख़ातिर अपनी
ज़िन्दगियों से खेलते रहे और हँसते-हँसते फाँसी पर चढ़ते रहे...इसलिए उनके
विरोधी भी उनके विरुद्ध कुछ नहीं कर सकते। उनके अन्तिम शहीदों साको और
वैल्जेटी को अभी पिछले साल फाँसी हुई। वे जिस दिलेरी से फाँसी पर लटके,
सब जानते हैं। बस यही संक्षिप्त इतिहास है – अराजकतावाद और उसके कार्यों
का। अगली बार साम्यवाद के बारे में लेख लिखेंगे।
212 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़