भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 217, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंमें फाँसी दे दी गयी। अगले ही दिन इसके बदले में ब्लेटिक, पुलिस अधिकारी
की हत्या कर दी गयी। आस्ट्रिया की सरकार गुस्से में आ गयी और वियना में
पुलिस ने ज़बरदस्त घेराबन्दी करके अनेक व्यक्ति गिरफ़्तार कर लिये और दो को
फाँसी पर टाँग दिया।
उधर लियुन में हड़तालें हुईं। एक हड़ताली फुरनियर ने अपने पूँजीपति मालिक
को गोली मार दी। उसके अभिनन्दन समारोह में एक पिस्तौल उपहार-स्वरूप दी
गयी। 1888 में वहाँ बहुत गड़बड़ी मची हुई थी और रेशम के मज़दूर भूखों मर रहे
थे। पूँजीपतियों के समाचारपत्र मालिक और उनके दूसरे धनी मित्र एक जगह ऐश
उड़ाने में मसरूफ़ थे। वहीं एक बम फेंक दिया गया। अमीर लोग काँप उठे। 60
अराजकतावादी पकड़े गये। उनमें से केवल तीन ही बरी किये गये। लेकिन फिर
भी असली बम फेंकने वाले की बहुत तलाश की जाती रही। अन्त में वह पकड़ा
गया और फाँसी पर लटका दिया गया। बस इस तरह ही उनके विचारों की लाइन
पर काम चल पड़ा। फिर तो जहाँ भी हड़ताल होती, वहीं क़त्ल भी हो जाता। इन
बातों का ज़िम्मेदार भी अराजकतावादियों को ही ठहराया जाता, इसलिए इस नाम
से ही लोग थर-थर काँपने लगे।
उधर एक जर्मन अराजकतावादी जहानमोस्ट, जो पहले दफ़्तरी का काम करता
था, 1882 में अमेरिका जा पहुँचा। उसने भी यह विचार जनता के समक्ष रखने आरम्भ
किये। वह भाषण बड़ा सुन्दर देता था और उसका अमेरिका में बहुत प्रभाव पड़ा।
1886 में शिकागो आदि में बहुत-सी हड़तालें हो रही थीं। एक काग़ज़-कारखाने के
मज़दूरों में एक अराजकतावादी स्पाईज उपदेश दे रहा था। कारख़ाना-मालिकों ने इसे
बन्द करने की कोशिश की। वहाँ लड़ाई हो गयी। पुलिस बुलायी गयी, जिसने आते
ही गोली चला दी। छह आदमी मारे गये और कई ज़ख़्मी हो गये। स्पाईज को गुस्सा
आया। उसने स्वयं जाकर एक नोटिस कम्पोज करके मुद्रित कर दिया कि मज़दूरों को
मिलकर अपने निरपराध भाइयों के ख़ून का बदला लेना चाहिए। अगले दिन 4 मई,
1886 को 'हे मार्केट' में जलसा था। शहर का अध्यक्ष इसे देखने आया था। उसने
देखा कि वहाँ कोई आपत्तिजनक बातें नहीं हो रही हैं। वह चला गया। बाद में पुलिस
ने आकर बिना आगा-पीछा देखे मारपीट करनी शुरू कर दी और कहा कि जलसा
बन्द करो। तभी एक बम पुलिसवालों पर फेंका गया जिसके साथ ही बहुत से
पुलिसवाले मारे गये। कई व्यक्तियों को पकड़कर फाँसी की सज़ा दे दी गयी।
जाते-जाते उनमें से एक शख़्स कहने लगा – “मैं फिर कहता हूँ, मैं वर्तमान व्यवस्था
का कट्टर दुश्मन हूँ। मैं चाहता हूँ कि हम इस राजसत्ता को मिटा दें और खुद राजसत्ता
का इस्तेमाल करें। आप शायद हँसें कि मैं तो अब बम नहीं फेंक सकूँगा लेकिन मैं
बताता हूँ कि तुम्हारे जुल्मों ने सभी मज़दूरों को बम सँभालने और चलाने पर मजबूर
कर दिया है। यह जान लो कि मैं सच कह रहा हूँ कि मेरे फाँसी लगने पर और भी
अन्तरराष्ट्रीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का अध्ययन / 211