भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 215, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंबाद में उन्होंने राष्ट्रीय मज़दूर कांग्रेस पर क़ब्ज़ा कर लिया और 1860 से
1870 तक आप अपने दल को संगठित करते रहे। 4 सितम्बर, 1870 में पेरिस में
तीसरा पंचायती राज क़ायम करने की घोषणा की गयी। फ्रांस में कई स्थानों पर
पूँजीपति सरकार के विरुद्ध लड़ाइयाँ व विद्रोह हुए। लियोन शहर में विद्रोह भड़का।
उसमें बैकुनिन शामिल हुए। इनका पलड़ा ही भारी रहा। कुछ ही दिनों बाद वहाँ
उनकी हार हो गयी और वे वहाँ से लौट आये।
1873 में हसपानिया में बग़ावत खड़ी हो गयी। उसमें शामिल होकर ये लड़े।
कुछ दिन तक तो मामला खूब गरम रहा लेकिन अन्त में वहाँ भी हार हो गयी।
वहाँ से लौटे तो इटली में बग़ावत जारी थी। वहाँ जाकर इन्होंने युद्ध की बागडोर
हाथ में ले ली। गैरीबाल्डी भी कुछ विरोध के बाद उनके साथ मिल गये थे। कुछ
दिनों के दंगों के बाद वहाँ भी हार हो गयी। इस तरह उनका सारा जीवन
लड़ने-भिड़ने में गुज़र गया। अन्त में जब वह बूढ़े हो गये तो उन्होंने अपने साथियों
को ख़त लिखे कि अब मैं अपने हाथों से नेतृत्व की बागडोर छोड़ता हूँ ताकि काम
में रुकावट न पड़े। अन्त में जुलाई, 1876 में बीमारी की हालत में उनका निधन
हो गया।
बाद में बहुत ताक़तवर चार व्यक्ति इस कार्य के लिए कमर कसकर तैयार
हुए। वे थे कारलो केफियर्स, इटली के रहने वाले, काफ़ी सम्पन्न परिवार से थे।
दूसरे, माला टेम्टा। आप बड़े विद्वान डॉक्टर थे। लेकिन आप सभी कुछ छोड़कर
युगान्तकारी बन गये। तीसरे, पाल ब्रसी भी बड़े मशहूर डॉक्टर थे। आप भी इसी
कार्य में लग गये। चौथे थे पीटर क्रोपोटकिन। आप रूसी परिवार से थे। कई बार
मज़ाक़ में कहा जाता था कि असल में आपको ही ज़ार बनना था। आप सभी
बैकुनिन के अनुयायी थे। आपने कहा कि हम ज़बान से बहुत प्रचार कर चुके
लेकिन कोई असर नहीं होता। नयी-नयी विचारधाराएँ सुनाकर थक गये हैं। जनता
पर कुछ भी प्रभाव नहीं पड़ता। इसलिए अब व्यावहारिक प्रचार आरम्भ किया जाये।
क्रोपोटकिन ने कहा –
"A single deed makes more propaganda in a few days than a thou-
sand pamphlets. The Government defends itself. It rages pitilessly, but
by this it only caused further deeds to be committed by one or more
persons and drives the insurgents to heroism. One deed bringsforth an-
other, opponents join the mutiny, the Govt. splits into factions, harsh-
ness intesifies the conflict, concessions come too late, the revolution
breaks out."
अर्थात एक ही व्यावहारिक काम हज़ारों किताबों और पत्रिकाओं से अधिक
प्रचार कर देता है। सरकार स्वयं अपनी रक्षा करती है। उसे गुस्सा आता है। जलन
होती है और वह दमन करती है। कई लोग थककर प्रतिशोध के लिए तैयार हो जाते
अन्तरराष्ट्रीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का अध्ययन / 209