भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 213, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंहराम की खाने वाले भी काम करें। थोड़ा समय काम करके पैदावार अधिक होने
लगे। सभी लोग आराम से पढ़-लिख भी सकें। अपनेआप शान्ति भी रहे, खुशहाली
भी बढ़े। अर्थात वह इस बात पर ज़ोर देते हैं कि संसार से अज्ञानता दूर करना बहुत
आवश्यक है।
असल में सम्पत्ति सबसे बड़ा प्रश्न है, इसलिए इस पर विचार के लिए एक
अन्य लेख आवश्यक है। इसी वास्तविक प्रश्न पर कार्ल मैनिंग ने स्पष्ट रूप से
घोषित कर दिया था – 'Ask for work and if they don't give you work ask for
bread and if they do not give you work or bread, then take bread.' अर्थात
काम भी न मिले और रोटी भी प्राप्त न हो तो रोटी छीनकर खा लो। क्योंकि किसी
को क्या अधिकार है कि वह केक खाते हुए मौज़ उड़ाये जबकि दूसरे को रोटी
के सूखे टुकड़े भी न जुटें। इसी मसले पर उन्होंने कहा कि विपन्न के घर जन्म
लेने से कोई उम्रभर घिसटते गुज़ारे एवं सम्पन्न के घर जन्मने से ही किसी को हराम
की खाने का अवसर क्यों प्राप्त हो? 'माया से माया मिले' वाली बात भी रोकी
जाये। इन्हीं कारणों से सभी के लिए समान अवसर वाले सिद्धान्त के समक्ष उन्होंने
निजी सम्पत्ति की पवित्रता का भ्रम तोड़ा। वे कहते हैं कि सम्पत्ति भ्रष्टाचार से
जुटती है और उसकी रक्षा के लिए क़ानून की आवश्यकता पड़ती है जिससे कि
राजसत्ता की आवश्यकता होती है। दरअसल यही सारी गड़बड़ियों की जड़ है। इसे
समाप्त करते ही सारी गड़बड़ियाँ दूर हो जायेंगी। आख़िर वे क्या चाहते हैं, काम
कैसे चलेगा? यही काफ़ी विस्तृत प्रश्न है।
लेख में ऊपर यह बताया गया है कि अराजकतावादी पहले तो ईश्वर और धर्म
के विरुद्ध हैं, क्योंकि वह मानसिक गुलामी के कारण हैं। दूसरे राजसत्ता के विरुद्ध
हैं, क्योंकि यह शारीरिक गुलामी है। वे कहते हैं कि मनुष्य को स्वर्ग का लालच,
नरक का भय या क़ानून का डण्डा दिखाकर भले काम की प्रेरणा देना ग़लत है।
वैसे भी मनुष्य जैसे उच्च जीव का अपमान है। स्वतन्त्रता से ज्ञान प्राप्त करके अपनी
इच्छा अनुसार काम करें और प्रसन्नता से जीवन व्यतीत करें। लोग कहते हैं कि
इसका अर्थ यह हुआ कि हम उसे पहले की जंगली स्थितियों में रखना चाहते हैं,
जिस प्रकार हम आरम्भ में थे। लेकिन यह ग़लत है। उस समय अज्ञानता थी। मनुष्य
अधिक दूर तक नहीं जा सकता था। लेकिन अब पूर्ण ज्ञान से दुनिया में सम्पर्क
स्थापित करते हुए भी वह स्वतन्त्र रहे। धन का लोभ न हो। और धन का प्रश्न भी
समाप्त कर दिया जाये।
अगले लेख में हम इस दर्शन के सम्बन्ध में कुछ अन्य बातें, अनेक प्रकार के
विचार, इतिहास और इसके बदनाम होने के कारण और इसमें हिंसा भी शामिल
होने के बारे में लिखेंगे।
अन्तरराष्ट्रीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का अध्ययन / 207