भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 212, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंenergy into wrong channels, so long as most people are out of place
doing the things they want to do, living a life they want to live, crime
will be inevitable and all the laws on the statues can only increase but
never do away with crime."
अर्थात मनुष्य को अगर पूर्ण स्वतन्त्रता हो तो वह अपनी इच्छानुसार काम-काज
कर सके। अन्याय न हों। अगर इस तरह पूँजीपतियों द्वारा शोषण जारी रहेगा तो
बड़े-बड़े कानून भी कुछ नहीं कर सकते। लोग कहते हैं कि मनुष्य का स्वभाव
ही कुछ ऐसा है कि बिना शासन के रह ही नहीं सकता। बेलगाम होगा तो बहुत
नुकसान पहुँचायेगा। इस मानव-स्वभाव के सम्बन्ध में लॉर्ड ने अपनी किताब
‘प्रिंसिपल्स ऑफ़ पोलिटिक्स’ में लिखा है कि चींटियाँ एकजुट रह सकती हैं,
जानवर एकजुट रह सकते हैं, लेकिन मनुष्य नहीं रह सकते। मनुष्य ईश्वर की ओर
से ही लालची, अमानवीय और सुस्त बना है। ऐसी बातें सुनकर एमा गोल्डमैन गुस्से
में आ गयीं और उन्होंने ‘अनार्किज़्म एण्ड अदर एसेज़’ किताब में लिखा है :
"Every fool from king to policeman, from the flat headed person to the
visionless dausier in science presumes to speak authoritatively of human
nature." यानी जो भी गधा उठता है वही बढ़कर मानव स्वभाव पर अधिक
ज़ोरदार राय देता है। वह कहती हैं कि जो जितना बड़ा मूर्ख हो उतना ही वह इस
सम्बन्ध में अपनी राय को बहुमूल्य समझता है। आज तक किसी मनुष्य को पूर्ण
स्वतन्त्रता देकर भी देखी है जो हमेशा उसकी बुराइयों का रोना रोया जाता है। वे
कहती हैं कि छोटी पंचायतें बनें और स्वतन्त्रता से काम हो।
निजी सम्पत्ति
तीसरी सबसे आवश्यक और महत्त्वपूर्ण बात है निजी सम्पत्ति। वास्तव में दुनिया को
पेट का सवाल ही चला रहा है। इसके लिए ही धैर्य, सन्तोष आदि उपदेश गढ़े गये।
सभी कुछ इसके लिए किया जाता रहा। अब अराजकतावादी, साम्यवादी,
समाजवादी सभी सम्पत्ति के विरुद्ध हो गये हैं। वे कहते हैं : "Property is
robbery". (Proudhon) but without risk or danger to the robber.—Emma
Goldman.
सम्पत्ति बनाने का विचार मनुष्यों को लालची बना देता है। वह फिर
पत्थर-दिल होता चला जाता है। दयालुता और मानवता उसके मन से मिट जाती
है। सम्पत्ति की सुरक्षा के लिए राजसत्ता की आवश्यकता होती है। इससे फिर
लालच बढ़ता है और अन्त में परिणाम – पहले साम्राज्यवाद, फिर युद्ध होता है।
ख़ून-ख़राबा और अन्य बहुत नुक़सान होता है। अगर सबकुछ संयुक्त हो जाये तो
कोई लालच न रहे। मिल-जुलकर सभी काम करने लगें। चोरी, डाके की कोई
चिन्ता न रहे। पुलिस, जेल, कचहरी, फ़ौज की ज़रूरत न रहे। और मोटे पेटवाले,
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