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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 210, कुल 788 में से

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पृष्ठ 210

अराजकतावाद : दो
स्टेट या सरकार
इससे आगे की बात जो वे सामने नहीं लाना चाहते, वह है राजसत्ता। अगर हम राजसत्ता
का मूल खोजें तो दो परिणामों पर पहुँचते हैं। कुछ लोगों की धारणा है कि जंगली
मनुष्य की अक्ल विकसित होती रही, और लोगों ने मिल-जुलकर रहना आरम्भ कर
दिया। इस तरह राजसत्ता का जन्म हुआ। इसे उद्भव कहते हैं। दूसरे यह कि लोगों
को जंगली जानवरों से मुक़ाबले के लिए तथा अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए
मिलना और एकजुट होना पड़ा। फिर गुटों में लड़ाइयाँ हुईं और प्रत्येक को ताक़तवर
शत्रु का भय सताने लगा। इस प्रकार मिल-जुलकर राज क़ायम किये गये। उसके
पश्चात आवश्यकता या यूटीलिटेरियन थ्योरी यही है। हम चाहे दोनों को ही लें। उद्भव
वालों से पूछा जा सकता है कि अब ही क्यों उद्भव रुक गया? पंचायती राज के
बाद अराजकतावाद ही आता है और अन्यों को यह उत्तर है कि अब शासन की कोई
ज़रूरत ही नहीं। यह बहस तो पहले हो चुकी है। अगर इन या अन्य ऐसी बातों की
ओर अधिक ध्यान न भी दें तो भी यह स्वीकारना होगा कि लोगों ने वास्तव में सौदा
किया था, जिसे फ्रांस के प्रसिद्ध युगान्तकारी रूसो ने सामाजिक सौदा कहा है। सौदा
यह कि मनुष्य अपनी स्वतन्त्रता का एक विशेष भाग अर्थात अपनी आय का एक
हिस्सा, बलिदान करेगा जिसके एवज में उसे सुरक्षा और शान्ति उपलब्ध करायेंगे। इस
सबके पश्चात विचारणीय है कि क्या वह सौदा पूरी तरह ठीक रहा? शासन क़ायम
हो जाने के पश्चात राजसत्ता और ईश्वर ने साज़िश रच ली। लोगों से कहा कि हम
ईश्वर की ओर से भेजे गये हैं। लोग ईश्वर से भयभीत रहे और राजा मनमाने ज़ुल्म
करते रहे। ज़ार (रूस) और लुई (फ्रांस) के उदाहरण बहुत अच्छे ढंग से सब ढोल
की पोल खोल देते हैं। क्योंकि वह साज़िश बहुत समय तक चल नहीं सकी, पोप
ग्रेगोरी और किंग हैनरी में फूट पड़ गयी। पोप ने लोगों को हैनरी शासन के विरुद्ध
भड़काया। इसी तरह हैनरी ने ईश्वर का हौवा दूर करते हुए लोगों को पोप के विरुद्ध
भड़काया। कहने का आशय यह है कि स्वार्थी लोग लड़े और वे आडम्बर टूटे। ख़ैर,
पुन: लोग उठे और ज़ुल्मी लुई को मार डाला। दुनिया में भगदड़ मच गयी। पंचायती
204 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़