भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 199, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंख़रीदने-बेचने के लिए सम्मिलित हुआ करते थे। इस वर्ष दैनिक ‘ज़मींदार’ के
मालिक मियाँ सिराजुद्दीन तथा एक-दो अन्य सज्जनों ने इस अवसर पर एक सभा
करने का निश्चय किया। इसमें नये कलोनी एक्ट के विरुद्ध प्रस्ताव पास करने थे।
इस सभा में भाषण देने के लिए लाला जी को विशेष रूप से बुलाया गया था।
भारतमाता सोसाइटी के सदस्यों ने भी इस अवसर पर सभा करने का निश्चय किया।
भारतमाता सोसाइटी के सदस्य गरमदली थे, अतः वैधानिक रूप से आन्दोलन
चलाने का विचार रखने वाले सज्जन इससे थोड़े घबरा गये। भारतमाता सोसाइटी
की ओर से दो कार्यकर्ता वहाँ इस उद्देश्य से भेजे गये कि वे वहाँ पहुँचकर अपने
अनुकूल परिस्थिति बना लें, जिससे एक-दो दिन बाद सरदार अजीत सिंह जी अपने
अन्य साथियों के साथ पहुँचकर सफलता के साथ प्रचार कर सकें।
ज़मींदार-सभा की ओर से जो पण्डाल लगा था उसमें ही दो-एक दिन
भाषण देकर ‘भारतमाता सोसाइटी’ के कार्यकर्ताओं ने जन-साधारण की
सहानुभूति प्राप्त कर ली। उधर जिस दिन स्वर्गीय लाला जी लाहौर से रवाना हुए,
उसी दिन स. अजीत सिंह जी ने भी वहाँ के लिए प्रस्थान किया। लाला जी ने
स. अजीत सिंह से पुछवाया कि आपका भावी कार्यक्रम क्या है? अपने कार्यक्रम
की सूचना भी लाला जी ने दी कि सरकार ने कलोनी एक्ट में जो थोड़ा-सा
परिवर्तन कर दिया है उसके लिए सरकार का धन्यवाद देते हुए ये क़ानून को
रद्द करने की माँग करेंगे।
सरदार जी ने उत्तर में कहा – हमारा कार्यक्रम तो यह है कि जनता को
लगानबन्दी के लिए तैयार किया जाये। साथ ही हमारे कार्यक्रम में सरकार के प्रति
धन्यवाद को तो कोई स्थान मिल ही नहीं सकता।
लाला जी और सरदार जी दोनों ही लायलपुर पहुँचे। स्वर्गीय लाला जी का
विशाल जुलूस निकाला गया, जिसके कारण लगभग दो घण्टे में लाला जी पण्डाल
में पहुँच पाये। लेकिन हमारे ऐसे भी लोग थे जो जुलूस में सम्मिलित न होकर सीधे
पण्डाल में ही पहुँच गये थे और वहाँ भाषण आरम्भ हो गये थे। एक-दो छोटे-छोटे
भाषणों के पश्चात स. अजीत सिंह जी ने भाषण दिया। आप बहुत ही प्रभावशाली
व्याख्यानदाता थे। आपकी निर्भीक भाषण-शैली ने जनता को आपका भक्त बना
दिया और श्रोतागण भी जोश में आ चुके थे। जिस समय इस सभा के आयोजक
जुलूस को लेकर पण्डाल में पहुँचे, जनता ‘भारतमाता सोसाइटी’ के साथ हो चुकी
थी। एक-दो नरमदली नेताओं ने स. अजीत सिंह को बोलने से रोकने की कोशिश
की थी, लेकिन श्रोताओं ने उनको ऐसी फटकार लगायी कि वह अपना-सा मुँह
लेकर रह गये। इससे जनता के जोश में और भी वृद्धि हो गयी। एक किसान ने
उठकर एलान कर दिया कि मेरे पास 10 मुरब्बे ज़मीन है, जिसे मैं आपकी सेवा
में अर्पित करता हूँ, और अपनी पत्नी सहित देशसेवा के लिए तैयार हूँ।
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 193