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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 197, कुल 788 में से

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पृष्ठ 197

'भारतमाता' अख़बार तथा मेहता नन्दकिशोर
स. किशन सिंह तथा स. अजीत सिंह ने वापस लाहौर आकर 'भारतमाता' नामक
एक मासिक पत्र का प्रकाशन करना आरम्भ किया और आदरणीय मेहता नन्दकिशोर
को साथ लेकर अपने विचारों का प्रचार करना शुरू कर दिया। इनके पास न धन
था और न धनी वर्ग से सम्पर्क ही था। किसी सम्प्रदाय के नेता या महन्त भी नहीं
थे। अतः प्रचार-कार्य के लिए अपेक्षित सभी साधन स्वयं ही जुटाने पड़े। एक दिन
घण्टी बजाकर बाज़ार में कुछ लोगों को जमा कर लिया और इस विषय पर भाषण
देने लगे कि विदेशियों ने भारतीय उद्योग एवं व्यवसाय को किस प्रकार नष्ट किया
है। वहीं यह भी एलान कर दिया कि आगामी रविवार को एक महत्त्वपूर्ण सभा
'भारतमाता' के कार्यालय के पास, जो लाहौरी और शालामारी दरवाज़े के मध्य
स्थित है, होगी। पहली सभा पापड़ मण्डी में, दूसरी लाहौरी मण्डी में हुई। तीसरी
सभा में भाषणों से पूर्व एक पंजाबी नवयुवक ने बड़ी ही मर्मस्पर्शी तथा
देशभक्तिपूर्ण भावनाओं से सराबोर एक नज़्म पढ़ी, जिसकी श्रोताओं ने बहुत प्रशंसा
की। अब यह नौजवान भी इसी दल में सम्मिलित हो गये। यह नौजवान पंजाब के
प्रसिद्ध राष्ट्रकवि लाला लालचन्द 'फलक' थे, जो आज तक अपनी उत्साहपूर्ण
कविताओं से देश को जगाते रहे हैं। इसी सप्ताह लाला पिण्डीदास जी तथा डॉ.
ईश्वरी प्रसाद जी इत्यादि कुछ और सज्जन भी इस दल में सम्मिलित हो गये। इन
सबके दल में आने से 'अंजुमन मुहिब्बताने वतन' के नाम से एक संस्था बनायी
गयी, जो बाद में 'भारतमाता सोसाइटी' के नाम से प्रसिद्ध हुई।
आगामी रविवार को फिर एक सार्वजनिक सभा होने वाली थी। उसी दिन
लाहौर में श्रीमती ऐनी बीसेण्ट के भाषण का भी आयोजन था। कुछ मित्रों ने परामर्श
दिया कि इस अवसर पर भारतमाता सोसाइटी भंग कर दी जावे, किन्तु यह परामर्श
स्वीकार नहीं किया गया और न अपनी सभा को ही स्थगित करना उचित समझा।
आखिर सभा हुई तो उपस्थिति पर्याप्त थी। इसी सभा में यह घोषणा कर दी गयी
कि प्रत्येक रविवार को सभा हुआ करेगी और इस संस्था के प्रधान स. अजीत सिंह
तथा सेक्रेट्री मेहता नन्दकिशोर चुने गये हैं।
जाटों की सभा
एक-दो मास तक इसी प्रकार प्रचार होता रहा। एक दिन लाहौर और अमृतसर क्षेत्र
के जाट कृषकों ने लगान बढ़ाये जाने के विरुद्ध एक सभा करने का निश्चय किया।
अजमेरी दरवाज़े के बाहर रतनचन्द की सराय में यह सभा आयोजित की गयी थी,
किन्तु जब जाट लोग जमा हो गये तो डी.सी. ने रतनचन्द के लड़के को बुलाकर
जायदाद ज़ब्त कर लेने की धमकी दी। इस पर रतनचन्द के लड़के ने वहाँ एकत्र
हुए किसानों को अपनी सराय से बाहर निकाल दिया। इस स्थिति में किसानों ने
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 191