भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 195, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंसात रुपये देने पड़ते थे। इससे किसानों पर एक भारी बोझ आ पड़ा और वह
एकदम हतबुद्धि-से रह गये।
नया कलोनी एक्ट
दूसरी ओर सरकार ने लायलपुर इत्यादि में कई नहरें खुदवाकर और जालन्धर,
अमृतसर, होशियारपुर के निवासियों को बहुत-सी सुविधाओं का लालच देकर इस
क्षेत्र में बुला लिया था। ये लोग अपनी पुरानी ज़मीन-जायदाद छोड़कर आये और
कई वर्ष तक अपना ख़ून-पसीना एक करके इन्होंने इस जंगल को गुलज़ार कर
दिया। लेकिन अभी ये चैन भी न ले पाये थे कि नया कलोनी एक्ट इनके सर पर
आ गया। यह एक्ट क्या था, किसानों के अस्तित्व को ही मिटा देने का एक तरीक़ा
था। इस एक्ट के अनुसार हर व्यक्ति की जायदाद का वारिस केवल उसका बड़ा
लड़का ही हो सकता था। छोटे पुत्रों का उसमें कोई हिस्सा नहीं रखा गया था। बड़े
लड़के के मरने पर वह ज़मीन या अन्य जायदाद छोटे लड़कों को नहीं मिल सकती
थी, जिससे उस पर सरकार का अधिकार हो जाता था।
कोई आदमी अपनी ज़मीन पर खड़े वृक्षों को नहीं काट सकता था। उनसे वह
एक दातुन तक नहीं तोड़ सकता था। जो ज़मीनें उनको मिली थीं उन पर वह
केवल खेती कर सकते थे। किसी प्रकार का मकान या झोंपड़ा, यहाँ तक कि
पशुओं को चारा डालने के लिए खुरली तक नहीं बना सकते थे। क़ानून का
थोड़ा-सा भी उल्लंघन करने पर 24 घण्टे का नोटिस देकर तथाकथित अपराधी
की ज़मीन ज़ब्त की जा सकती थी। कहा जाता है कि ऐसा क़ानून बनाकर सरकार
चाहती थी कि थोड़े-से विदेशियों को तमाम ज़मीन का मालिक बना दिया जाये
और ज़मीन के हिन्दोस्तानी काश्तकार उनके सहारे पर रहें। इसके अतिरिक्त सरकार
यह भी चाहती थी कि अन्य प्रान्तों की भाँति पंजाब में थोड़े-से बड़े-बड़े ज़मींदार
हों और बाक़ी निहायत ग़रीब काश्तकार हों। इस प्रकार जनता दो वर्गों में विभक्त
हो जाये। मालदार कभी भी और किसी भी हालत में सरकार-विरोधियों का साथ
देने का साहस नहीं कर सकेंगे और निर्धन कृषकों को, जो दिन-रात मेहनत करके
भी पेट नहीं भर सकेंगे, इसका अवसर ही नहीं मिलेगा। इस प्रकार सरकार खुले
हाथों जो चाहेगी, करेगी।
अशान्ति के बीज
उन दिनों उत्तर प्रदेश और बिहार वग़ैरह सूबों में किसानों की हालत ऐसी ही है
(थी) लेकिन पंजाब के लोग जल्द ही सँभल गये। सरकार की इस नीति के विरुद्ध
उन्होंने ज़बरदस्त आन्दोलन प्रारम्भ किया। रावलपिण्डी की तरफ़ भी इन दिनों ही
नया बन्दोबस्त ख़त्म हुआ था और लगान बढ़ाया गया था। इस प्रकार सन् 1907
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 189