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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 193, कुल 788 में से

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पृष्ठ 193

स्वाधीनता के आन्दोलन में
पंजाब का पहला उभार
भगतसिंह ने जेल में पंजाब की राजनीतिक जागृति का इतिहास लिखा था,
जिसका निम्नलिखित अंश 1931 में लाहौर के साप्ताहिक 'बन्देमातरम्' में
धारावाहिक छपा था। यह उर्दू अनुवाद का हिन्दी रूपान्तर है। – स.
पंजाब के भूतपूर्व गवर्नर सर माइकेल ओडायर ने अपनी पुस्तक 'India: As I Saw'
में एक अप्रिय किन्तु साथ ही अत्यन्त महत्त्वपूर्ण सच्चाई को प्रकट किया है। उन्होंने
कहा है कि पंजाब राजनीतिक हलचलों में सबसे पीछे है। पंजाब के राजनीतिक
आन्दोलनों का जिन्हें थोड़ा-सा भी ज्ञान है, वह इस सच्चाई को भली प्रकार समझ
सकते हैं।
आज तक का इतिहास देखिये। भारत को स्वाधीन करने के लिए सर्वाधिक
बलिदान इस प्रान्त ने किया है। इसके लिए बड़े भारी-भारी संकट इस प्रान्त की
जनता को सहन करने पड़े हैं। राजनीतिक, धार्मिक आदि आन्दोलनों में पंजाब भारत
के अन्य प्रान्तों से आगे रहा है, और देश के लिए जानो-माल की कुर्बानी सबसे
ज़्यादा इसी सूबे के लोगों ने दी है, किन्तु इस पर भी हमें सिर झुकाकर यह स्वीकार
करना पड़ता है कि राजनीतिक क्षेत्र में पंजाब सबसे पीछे है।
इसका कारण केवल यह है कि राजनीतिक आन्दोलन यहाँ की जनता के
व्यक्तिगत जीवन का एक आवश्यक अंग नहीं बन सका। साहित्यिक क्षेत्र में भी
इस प्रान्त ने यथायोग्य स्थान प्राप्त नहीं किया। शिक्षित वर्ग के लिए उस समय तक
– ओडायर के इस पुस्तक के लिखने तक – स्वदेश की स्वाधीनता का प्रश्न
सबसे अधिक आवश्यक और महत्त्वपूर्ण नहीं बना था, इसलिए बहुधा कहा जाता
है कि यह सूबा बहुत पीछे है। हिन्दुस्तान में और भी बहुत-से ऐसे सूबे हैं जो पंजाब
से बहुत पीछे हैं, किन्तु खेद है कि यह अभागा सूबा इस प्रकार के आरोप सहकर
भी पीछे ही है।
पंजाब की विशेष अपनी कोई भाषा नहीं। भाषा न होने के कारण साहित्य-
सृजन के क्षेत्र में भी कोई प्रगति नहीं हो सकी। अतः शिक्षित समुदाय को पश्चिमी
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 187