भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 186, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंदिल्ली-केस के शहीद!
सितम्बर, 1928 के 'किरती' में प्रकाशित। - स.
पिछली बार हमने दिल्ली-साज़िश का कुछ हाल भाई बालमुकुन्द जी के जीवन
से दिया। भाई बालमुकुन्द जी, जैसाकि पिछली बार बताया गया था, गिरफ़्तारी के
समय महाराजा जोधपुर के लड़कों को पढ़ाते थे। एक दिन मोटर में राजकुमार के
साथ बैठे सैर को जा रहे थे कि अंग्रेज़ अधिकारी उनके गिरफ़्तारी के वारण्ट लेकर
पहुँच गया। वहीं गिरफ़्तार कर लिये गये। वहीं आपके घर की तलाशी ली गयी।
सरकारी गवाह दीनानाथ ने पहले ही जो बयान दिया था, उसके मुताबिक़ भाई
बालमुकुन्द जी पंजाब के नेता चुने गये थे और उन्हें दो बम दिये गये थे। दीनानाथ
के कथनानुसार वे दो बम भाई बालमुकुन्द जी के पास ही थे। कहीं लौटाये नहीं
गये। इसी ख़याल में घर की तलाशी हुई। सारा घर कमर तक खोद डाला गया।
छतें उधेड़ दी गयीं, लेकिन बम नहीं मिले। ख़ैर! उनके पास से कोई काग़ज़-पत्र
भी ऐसा-वैसा नहीं मिला, जिससे कोई ख़ास सबूत मिल सकता, लेकिन फिर भी
उन्हें फाँसी की सज़ा मिली। भाई बालमुकुन्द जी पहले लाला लाजपतराय के अछूतों
के कार्यक्रम में काम करते रहे थे और पहाड़ों में जहाँ कि छूत-छात बहुत मानी
जाती है, वहीं वे प्रचार के लिए निकल गये थे। वहाँ के उनके साथी उनकी योग्यता
की बड़ी प्रशंसा करते हैं।
मास्टर अमीरचन्द जी
इस केस में चार आदमियों को फाँसी की सज़ा हुई थी। उनमें से मास्टर अमीरचन्द
जी कोई 50 साल की उम्र के थे। वे बड़े लायक और योग्य आदमी थे। आप
दिल्ली के रहने वाले थे। उच्च शिक्षा प्राप्त थे। बड़े धर्मात्मा थे। मिशन स्कूल,
दिल्ली में पढ़ाते थे। आपके दिल में हिन्दुस्तान की उन्नति का बहुत ख़याल था।
आप उर्दू और अंग्रेज़ी के बड़े अच्छे लेखक थे। पहले जब स्वामी रामतीर्थ पंजाब
में आये तब आपने उनके धार्मिक और देशभक्तिपूर्ण विचारों का प्रचार बड़े ज़ोरों
से किया। आपने 'ख़तूते राम' आदि कई पुस्तकें छपवायीं। बाद में लाला हरदयाल
जी एम.ए. अपनी छात्रवृत्ति छोड़ विलायत से अंग्रेज़ी शिक्षा का बहिष्कार कर भारत
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