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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 171, कुल 788 में से

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पृष्ठ 171

शिर नेहारि आमारि
नत शिर ओई शिखर हिमाद्रीय!
यानी हे विद्रोही वीर! तुम एकदम यह कहते हो कि मैं कब से सिर उठाये
खड़ा हूँ। मेरा ऊँचा सिर देखकर हिमालय ने भी अपना सिर शर्म के मारे झुका दिया।
आगे जाकर उसकी सख़्ती और नरमी का वर्णन किया है। कहीं वह मौत से
(के साथ) नाच कर रहा है, कहीं वह संसार का एक ही बार सर्वनाश करने पर
तुला हुआ है। वह बिजली की तरह चमकता है। वह संगीत की तरह मीठा है।
विधवा, गुलाम, मज़लूम, ग़रीब, भूखे और पीड़ित लोगों में बैठकर वह लगातार रोता
रहता है। ऐसे विचित्र जीव की विचित्र महिमा का वर्णन करते हुए अन्त में वे
विद्रोही के मुँह से कहलवाते हैं –
महा विद्रोही रणक्लान्त
आमि शेई दिन हँबो शान्त,
जबे उत्पीडि़तेर क्रन्दन-रोल
आकाशे बातासे ध्वनिबे ना
अत्याचारीर खड्ग कृपाण
भीम रणभूमे रणिबे ना
विद्रोही रणक्लान्त
आमि शेई दिन हँबो शान्त!
अर्थात्, मैं विद्रोही अब लड़ाई से थक गया हूँ। और मैं भी उसी दिन शान्त
हो जाऊँगा जिस दिन किसी दुखी की आह या चीत्कार आकाश में जाकर आग
न लगा सकेगा, यानी कोई दुखी न रहेगा, और जब ज़ालिमों, अत्याचारियों की
भयानक तलवार मैदान में चलनी बन्द हो जायेगी, यानी बाक़ी ही न रहेंगी, तब,
और तभी मैं शान्त हो सकूँगा और हो भी जाऊँगा।
ऐसे विचित्र विद्रोही जीव जो पूरे विश्व से टकरा जाते हैं और स्वयं को जलती
आग में झोक देते हैं, अपना ऐशो-आराम सब भूल जाते हैं और दुनिया की सुन्दरता,
श्रृंगार में कुछ वृद्धि कर देते हैं और उनके बलिदानों से ही विश्व में कुछ प्रगति होती
है। ऐसे ही वीर हर देश में हर समय होते हैं। हिन्दुस्तान में भी यही पूजनीय देवते
जन्म लेते रहे हैं, ले रहे हैं और लेते रहेंगे। हिन्दुस्तान में से भी पंजाब ने ऐसे रत्न
अधिक दिये हैं, बीसवीं शती के ऐसे ही सबसे पहले शहीद श्री मदनलाल जी
ढींगरा हैं।
वे कोई लीडर तो थे नहीं कि उनके जीते-जी उनका जीवन-चरित्र छापकर
दो-दो आने में बिक जाता। वे अवतार भी नहीं थे कि ज्योतिष से बताकर शोर मचा
दिया जाता कि हम तो पहले ही समझ गये थे कि वे बहुत ‘बड़े’ आदमी थे। उनकी
किन्हीं ऐसी बातों का भी हमें पता नहीं कि हम लिख सकें कि ‘होनहार बिरवान
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 165