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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 166, कुल 788 में से

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पृष्ठ 166

से वे एक और दरवाज़ा तोड़ते रहे, जिससे कि उनका बहुत-सा समय नष्ट हो गया
और भीतर से कुछ भी न मिला।
उधर से सेना ने बड़े ज़ोर से धावा बोला। आख़िर लड़ते-लड़ते वहाँ से लौटना
पड़ा। उस लड़ाई में उन्होंने 8 सिपाही मारे और 15 को घायल किया। उनके सात
आदमी मारे गये। वहाँ से भी कुछ हथियार और घोड़े लेकर भाग निकले। आगे-आगे
वे और पीछे-पीछे मलेर कोटला की सेना और –
"A sort of running fight was kept along. Shots fired and many more
Kookas were wounded till both the parties reached the village of Rur in
the Patiala State, the Kookas carrying most of the wounded with them."
यानी भागते जा रहे थे। और लड़ते जा रहे थे। उनके और कई आदमी घायल
हो गये और वे उन्हें भी साथ ही उठा ले जाते थे। आख़िर पटियाला राज्य के रूड़
गाँव में ये पहुँचे और जंगल में छिप गये। कुछ घण्टों के बाद शिवपुर के नाज़िम
ने फिर हमला बोल दिया। लड़ाई छिड़ गयी पर बेचारे कूके थके-हारे थे। आख़िर
68 व्यक्ति पकड़ लिये गये। उनमें से दो औरतें थीं, वे पटियाला राज को दे दी
गयीं।
इसी बात को विद्रोह कहा जाता है। डिप्टी कमिश्नर लुधियाना मि. कावन ने
एक पत्र में कहा था –
"It looks like the commencement of an insurrection..."
यानी यह एक विद्रोह की तरह नज़र आता है।
अगले दिन मलेर कोटला लाकर तोप गाड़ दी गयी और एक-एक कर 50
कूके वीर तोप के आगे बाँध-बाँधकर उड़ा दिये गये। हरेक बहादुरी से
अपनी-अपनी बारी पर तोप के आगे झुक जाता और सत्त श्री अकाल कहता हुआ
तोप से उड़ जाता। फिर कुछ पता नहीं चलता कि वह किस संसार में चला गया।
इस तरह 49 व्यक्ति उड़ा दिये गये। पचासवाँ एक तेरह वर्ष का लड़का था। उसके
पास झुककर डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि बेवकूफ़ राम सिंह का साथ छोड़ दे,
तुम्हें माफ़ कर दिया जायेगा। लेकिन वह बालक यह बात सहन नहीं कर सका और
उछलकर उसने कावन की दाढ़ी पकड़ ली और तब तक न छोड़ी जब तक उसके
दोनों हाथ न काट दिये गये। बाक़ी 16 आदमी अगले दिन मलोध जाकर फाँसी
पर लटका दिये गये। उधर बाबा राम सिंह को उनके चार सूबों के साथ गिरफ़्तार
करके पहले इलाहाबाद और बाद में रंगून भेज दिया गया। यह गिरफ़्तारी (रेगूलेशन)
1818 के अनुसार हुई थी।
जब यह ख़बर देश में फैली तो और लोग बहुत हैरान हुए कि यह क्या बना।
विद्रोह शुरू करके बाबाजी ने हमें भी क्यों न बुलाया और सैकड़ों लोग घर-बार
छोड़कर भैणी की ओर चल पड़े। एक गिरोह जिसमें कि 172 आदमी थे, कर्नल
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