भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 162, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकूका विद्रोह : दो
अक्टूबर, 1928 में 'किरती' मासिक पत्रिका में भगतसिंह ने 'युग पलटने का
अग्निकुण्ड' शीर्षक से पंजाब के तख़्तापलट आन्दोलनों के इतिहास के रूप में लेख
लिखे। यह लेख उन्होंने 'विद्रोही' के नाम से लिखा था। – स.
आज हम पंजाब के तख़्ता पलटने के आन्दोलन और पोलिटिकल जागृति का
इतिहास पाठकों के सामने रख रहे हैं। पंजाब में सबसे पहली पोलिटिकल हलचल
कूका आन्दोलन से शुरू होती है। वैसे तो वह आन्दोलन साम्प्रदायिक-सा नज़र आता
है, लेकिन ज़रा ग़ौर से देखें तो वह बड़ा भारी पोलिटिकल आन्दोलन था, जिसमें
धर्म भी मिला हुआ था, जिस तरह कि सिक्ख आन्दोलन में पहले धर्म और
राजनीति मिली-जुली थी। ख़ैर, हम देखते हैं कि हमारी आपस की साम्प्रदायिकता
और तंगदिली का यही परिणाम निकलता है कि हम अपने बड़े-बड़े महापुरुषों को
इस तरह भूल जाते हैं जैसेकि वे हुए ही न हों। यही स्थिति हम अपने बड़े भारी
महापुरुष 'गुरु' राम सिंह के सम्बन्ध में देखते हैं। हम 'गुरु' नहीं कह सकते और
वे गुरु कहते हैं, इसीलिए हमारा उनसे कोई सम्बन्ध नहीं – आदि बातें कहकर
हमने उन्हें दूर फेंक रखा है। यही पंजाब का सबसे बड़ा घाटा है। बंगाल के जितने
भी बड़े-बड़े आदमी हुए हैं, उनकी हर साल बरसिंयाँ मनायी जाती हैं, सभी
अख़बारों में उन पर लेख दिये जाते हैं, यह समझा जाता है कि मौक़ा मिला तो
इस पर फिर विचार करेंगे और जो मसाला मिला, वह पाठकों के सामने पेश करेंगे।
पंजाब को सोये थोड़े ही दिन हुए थे, लेकिन नींद बड़ी गहरी आयी। हालाँकि
अब फिर होश आने लगा है। बड़ा भारी आन्दोलन उठा। उसे दबाने की कोशिश
की गयी। कुछ ईश्वर ने स्थिति भी ऐसी ही पैदा कर दी – वह आन्दोलन भी
कुचल दिया गया। उस आन्दोलन का नाम था 'कूका आन्दोलन'। कुछ धार्मिक,
कुछ सामाजिक रंग-रूप रखते हुए भी वह आन्दोलन एक तख़्ता पलटने का नहीं,
युग पलटने का था।
चूँकि अब इन सभी आन्दोलनों का इतिहास यह बताता है कि आज़ादी के लिए
लड़ने वाले लोगों का एक अलग ही वर्ग बन जाता है, जिनमें न दुनिया का मोह
होता है और न पाखण्डी साधुओं जैसा दुनिया का त्याग ही। जो सिपाही तो होते
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