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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 159, कुल 788 में से

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पृष्ठ 159

इधर तो यह सबकुछ हो रहा था, उधर डिप्टी कमिश्नर ने गुरु राम सिंह को
बुलाया और घर लौटा दिया, क्योंकि वह समझता था कि वे निर्दोष हैं, क्योंकि
उन्होंने उन उन्मत्त तथा उत्तेजित कूक़ों की ख़बर देकर पुलिस को चौकन्ना कर
दिया था। गुरु राम सिंह की निर्दोषता के सम्बध में पंजाब सरकार ने भारत सरकार
को यूँ लिखा –
No direct evidence against Ram Singh in this case is sufficient to put
him on this trial.
परन्तु 17 जनवरी को कमिश्नर की आज्ञा से घुड़सवार तथा दूसरी पुलिस ने
कर्नल बायली (Baille) के नेतृत्व में, अध्यक्षता में भैणी नगर को एकाएक घेर
लिया। सब लोगों को यह देखकर बहुत आश्चर्य हुआ, परन्तु जब उन्हें मालूम हुआ
कि सरकार उन्हें पकड़ना चाहती है तब उन्होंने अपनेआप को शान्तिपूर्वक पुलिस
के हवाले कर दिया। उस समय गुरु राम सिंह के साथ चार व्यक्ति, चार विभिन्न
स्थानों के सूबे श्री साहिब सिंह, श्री जवाहर सिंह, श्री गुरुदत्त सिंह तथा श्री तन्नू
सिंह भी थे। उन्हें भी गिरफ़्तार कर लिया गया। उन्हें पहिले तो इलाहाबाद भेजा गया
और बाद में रंगून भेज दिया गया। यह गिरफ़्तारी रेगूलेशन 1818 के अनुसार हुई थी।
यहीं पर गुरु राम सिंह जी की वह चाल उलटी पड़ी। यदि उस समय वे बचे रहते
तो फिर शीघ्र ही सब स्थिति सँभल जाती।
इधर ज्यों-ज्यों प्रान्तभर में विद्रोह का समाचार फैलने लगा, त्यों-त्यों ये लोग
भैणी की ओर जाने लगे। सब लोगों का विचार था कि जिस दिन की प्रतीक्षा थी,
वह आ गया। इधर पुलिस भी चौकन्नी हो गयी थी। जहाँ कोई कूके मिल जाते
वहीं पर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाता। इसी तरह 172 कूक़ों के एक गुट से कर्नल
बायली की भेंट हो गयी। उनमें से चार तो विभिन्न स्थानों के सूबे – श्री ब्रह्मा सिंह,
श्री काहन सिंह, श्री पहाड़ा सिंह तथा श्री हुकुम सिंह तो तुरन्त पहिले लुधियाना
और फिर गुरु जी के पास इलाहाबाद भेज दिये गये और 120 घरों को लौटा दिये
गये और शेष पचास –
Having no homes and ostensible means of living, being in fact, a
dangerous clan of this sort who having sold all they possessed, hold
themselves in readiness to perform any act that their leaders may order.
– को जेल में बन्द कर दिया गया। इस तरह कुछ ही दिनों में सब मामला
शान्त हो गया।
उसके बाद –
सबकुछ हो चुका। नाटक की मुख्य घटना हो चुकी। अब तो कथा समाप्त
करने को परिशिष्ट-मात्र शेष है। मि. कावन और मि. फार्सिथ पर summary
execution करने का अभियोग चला। उन्होंने पंजाब की भीषण स्थिति का
रोमांचकारी चित्रण करने में कोई कसर उठा न रखी और पुरस्कार पाने की
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 153