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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 158, कुल 788 में से

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पृष्ठ 158

भूलकर प्रणम्य समझने में बाधित (को बाध्य) होते हैं। ख़ैर! एक-एक करके
49 तो तोप से उड़ा दिये गये, परन्तु पचासवें ने, जोकि तेरह वर्षीय बालक था,
वहाँ फ़साद खड़ा कर दिया। मि. कावन एक पत्र में लिखता है –
It was my intention to have had 50 men blown away, and to have
sent the remaining 16 rebels to Malodh to be executed there tomorrow,
but one escaped from the guards and made a furious attack on me, seizing
me by the beard and endeavouring to strangle me; and as he was a very
powerful man, I had considerable difficulty in releasing myself...The of-
ficials whom he attacked drew their sword and cut him down.
इसी घटना के सम्बन्ध में जो बात सुनी जाती है वह यूँ है कि 50वाँ व्यक्ति
एक तेरह वर्षीय बालक था। उसे देखकर मिसेज़ कावन को दया आयी। उसने अपने
पति से उसे छोड़ देने को कहा। पत्नी की प्रेरणा से मि. कावन ने झुककर उस
बालक से कहा, “अरे, पाजी राम सिंह का साथ छोड़ दो और कह दो, मैं उसका
अनुयायी नहीं हूँ, तुम्हें छोड़ दिया जायेगा।” वीर बालक अपने गुरु के प्रति यह
अपमानजनक शब्द सहन न कर सका। क्रुद्ध सिंह की तरह वह झपटा और उसने
कावन को दाढ़ी से पकड़ लिया और तब तक न छोड़ा, जब तक उसके दोनों हाथ
न काट दिये गये और तलवारों से क़त्ल न कर दिया गया। अस्तु, इस तरह उस
दुखान्त नाटक का एक और पर्व समाप्त हो गया।
बिना अभियोग चलाये 50 को तोप से उड़ा देना, summary execution कर
देना एकदम अनुचित दीख पड़ता है। उधर मि. फ़ार्सिथ, अम्बाला-कमिश्नर ने उन्हें
एक पत्र में लिख दिया था कि बिना अभियोग चलाये किसी को मृत्युदण्ड मत
देना, परन्तु मि. कावन ने मनमानी कर डाली और जब मि. कावन पर बाद में
मुक़दमा चला तो उन्होंने कमिश्नर साहिब का अगले दिन का पत्र, जिसमें उनके
इस कार्य की प्रशंसा की गयी थी, पेश किया। परन्तु उसके सम्बन्ध में मि. फ़ार्सिथ
का कहना है कि मैंने परिस्थिति नाजुक जान यह उचित समझा कि लोगों को
किंचित-मात्र भी सन्देह न होने पाये कि अफ़सरों में भी आपस में कुछ खेंचातानी
हो रही है। अतः उसके पिछले कार्य की प्रशंसा कर और summary execution
करने से मना कर दिया था। परन्तु शेष 16 व्यक्तियों को भी तो अगले ही दिन
फाँसी पर लटका दिया गया।
उन वीरों की मृत्यु के प्रति उपेक्षा ने अफ़सरों को भी प्रभावित कर दिया था।
Mr. E. Perkinson, Deputy Superintendent Police अपनी 17 जनवरी की रिपोर्ट
में दो व्यक्तियों के सम्बन्ध में लिखते हैं –
Both Hira Singh and Lehna Singh the leaders taken. They are gen-
erally well dressed and well to do men; but have the appearance of bold
and determined looking fellows.
152 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़