भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 156, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंहोकर उनकी आज्ञाओं तथा प्रार्थनाओं की उपेक्षा करके झगड़े-फ़साद के लिए जा
रहे हैं। मैं अभी से पुलिस को सब समाचार देकर सतर्क कर देना चाहता हूँ। वह
उनसे निपट ले। मैं अनर्थ का उत्तरदायी नहीं हूँ।'
लुधियाना के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर मि. Cowan अपने 15 जनवरी के
पत्र में अम्बाला-कमिश्नर को इस घटना के बारे में इस प्रकार लिखते हैं –
He (a police reporter) stated to me that Ram Singh, the leader of the
kookas, went to those men, with a turban around his neck, and entreated
them not to create a disturbance; and they would not listen to him; and
that Ram Singh then came to the Deputy Inspector and reported to him
that these men were upto mischief, and that he had no control over them.
परन्तु उस समय सरकार या पुलिस जान-बूझकर चुप रही। चुपचाप उनको
अंग्रेज़ राज्य में से रियासत में घुसने दिया। उसी समय उन सबको गिरफ़्तार क्यों नहीं
कर लिया गया? कुछ दिनों के बाद उनका जोश ठण्डा हो ही जाता। परन्तु नहीं,
सरकार तो स्वयं चाहती थी कि उसे कोई अवसर मिले, जिससे वह आन्दोलन
कुचला जा सके। इस समय मनोवांछित सुअवसर मिल गया। लोगों का तो यहाँ तक
कहना है कि उन लोगों को उत्तेजित करने में भी सरकारी आदमियों का हाथ था।
ख़ैर, उसके सम्बन्ध में कुछ न कह सकने पर भी हम सरकार पर जान-बूझकर
चुप रहने का अपराध लगा सकते हैं। अस्तु, वे 150 कूके वीर पटियाला के सीमान्त
स्थित रब्बू गाँव के बाहर जा ठहरे। रातभर वहीं विश्राम किया। अगले दिन भी वहीं
रहे। शायद और साथियों की प्रतीक्षा कर रहे थे।
14 जनवरी, सन् 1872 ई. को सायंकाल उन्होंने कुछ सिक्ख सरदारों के
मलोध (Malodh) नामक क़िले पर आक्रमण कर दिया। इस क़िले पर आक्रमण
क्यों किया गया? इसके सम्बन्ध में डिस्ट्रिक्ट गजेटियर में लिखा है कि उन्हें आशा
थी कि यह सरदार विद्रोह में उनका नेतृत्व लेंगे। सम्भव है, पहिले विराट आयोजन
में ऐसी ही तैयारी रही हो और उस समय उन्होंने अपरिपक्व विद्रोह उठता देख
सहायता देने अथवा नेतृत्व लेने से इन्कार कर दिया हो। ख़ैर, कूक़ों ने वहाँ आक्रमण
कर दिया और कुछ शस्त्र, कुछ घोड़े तथा एक तोप लेकर चलते बने। वहाँ पर दोनों
ओर के दो-दो व्यक्ति मरे और कुछ घायल हुए।
अगले दिन प्रातःकाल 7 बजे वे मलेर कोटला पहुँच गये। सरकार ने पटियाला
तथा मलेर कोटला दोनों राज्यों को पहले से सतर्क कर दिया था। मलेर कोटला की
रक्षा के लिए विशेष तौर से तैयारी की गयी थी, परन्तु इन दुःसाहसी वीरों ने इस
वेग से आक्रमण किया कि शहर में तो क्या, महल तक में जा घुसे। ख़ज़ाना लूटने
की कोशिश होने लगी। लूट ही तो लिया होता परन्तु दुर्भाग्यवश भूल से एक और
दरवाज़ा तोड़ने में बहुत समय नष्ट हो गया, जहाँ कि कुछ व्यर्थ के काग़ज़ों के
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