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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 150, कुल 788 में से

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पृष्ठ 150

कूका विद्रोह : एक
फ़रवरी, 1928 में दिल्ली से प्रकाशित 'महारथी' में कूका-विद्रोह के इतिहास
की जानकारी देने वाला भगतसिंह का यह लेख बी.एस. सिन्धू नाम से छपा था। –
स.
सिक्खों में एक उप सम्प्रदाय है, जो 'नामधारी' या कूका कहलाता है। इसका
इतिहास कुछ बहुत पुराना नहीं है। गत शताब्दी के उत्तरार्द्ध में ही इसका आविर्भाव
हुआ था। आज वह एक संकुचित धार्मिक सम्प्रदाय दीख पड़ता है, परन्तु इसके
संस्थापक श्री गुरु राम सिंह एक कट्टर विप्लवी थे। एक प्रसिद्ध ईश्वरभक्त, समाज
के दोष देखकर एक विद्रोही समाज-सुधारक बन गया और एक सच्चे
समाज-सुधारक की भाँति, जब वह कर्मक्षेत्र में अग्रसर हुआ तो उसने देखा कि देश
की उन्नति के लिए पराधीनता की बेड़ियों का काटना परमावश्यक है। विदेशी
शासन के विरुद्ध विद्रोह की तैयारी का विराट आयोजन हुआ। उसकी तैयारी में ही
जो कुछ झगड़ा-फ़साद हो गया था, उसी से शासकों को समस्त आन्दोलन के
कुचल डालने का सुअवसर मिल गया और उस सब प्रयास का निष्फलता के
अतिरिक्त और कुछ परिणाम न निकल सका।
कूका आन्दोलन का इतिहास, आज तक लोगों के सामने नहीं आया। किसी
ने उन्हें महत्त्वपूर्ण नहीं समझा। कूकों को भटके हुए तथा मूर्ख कहकर हम अपने
कर्त्तव्य से छुट्टी पा जाते हैं। स्वार्थ के लिए अथवा लोभ के लिए यदि उन लोगों
ने प्राण दिये होते तो हम उपेक्षा दिखा सकते थे, परन्तु उनकी तो 'मूर्खता' में भी
'देशप्रेम' का भाव कूट-कूटकर भरा था। वे तो तोप के मुँह से बँधते समय हँस
देते थे। वे तो आनन्द से 'सत्त श्री अकाल' के तुमुल निनाद से आकाश-पाताल
को आच्छादित कर देते थे। उनके मस्तक पर व्यथा, चिन्ता अथवा पश्चाताप की
रेखा भी नहीं दीख पड़ती थी। क्या वे भूल जाने योग्य हैं? उनका गुरुतर अपराध
शायद विफलता के अतिरिक्त कुछ भी नहीं। परन्तु स्कॉट वीर विलियम वालीस
भी तो विफल हो मृत्युदण्ड का भागी बना था। उसकी तो आज समस्त इंग्लैण्ड
पूजा करता है। फिर हमारे असफल देशभक्त ही इस तरह क्यों भुलाकर निविड़
अन्धकार में फेंक दिये जायें? अस्तु।
144 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़