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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 148, कुल 788 में से

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पृष्ठ 148

किरपाल सिंह ने तो पहले से ही सारा मामला बिगाड़ दिया था। हिन्दुस्तानी सिपाही
निहत्थे कर दिये गये। धड़ाधड़ गिरफ़्तारियाँ होने लगीं। हवलदार ने सहायता करने
से इन्कार कर दिया। कर्तार सिंह की कोशिश असफल रही। निराश हो लाहौर आये।
पंजाबभर में गिरफ़्तारियों का चक्कर तेज़ हो गया। अब साथी भी टूटने लगे। ऐसी
स्थिति में रासबिहारी बोस मायूस होकर लाहौर के एक मकान में लेटे हुए थे। कर्तार
सिंह भी वहीं आकर एक चारपाई पर दूसरी ओर मुँह फेर लेट गये। परस्पर कोई
बात नहीं की, लेकिन चुपचाप ही एक-दूसरे के दिल की हालत समझ गये। इनकी
हालत का अनुमान हम क्या लगा सकते हैं!
दरै-तदबीर पर सर फोड़ना शेवः रहा अपना,
वसीले हाथ ही ना आये क़िस्मत आज़माई के।
(हमारा काम भाग्य के दर पर सर फोड़ना ही रहा, लेकिन भाग्य आज़माने के
साधन ही हाथ नहीं आये।)
उनकी तो यही ख़्वाहिश थी कि कहीं लड़ाई हो और वे अपने देश के लिए
लड़ते-लड़ते प्राण दे दें। फिर सरगोधा के नज़दीक चक्क नम्बर पाँच में आ गये।
फिर विद्रोह का चर्चा छेड़ दिया। वहीं पकड़े गये। जंज़ीरों में जकड़े गये। निर्भीक
विद्रोही कर्तार सिंह को लाहौर स्टेशन पर लाया गया। पुलिस कप्तान से कहा,
“मिस्टर टामकिन, कुछ खाना तो लाइये।” वह कितना मस्त-मौला था। इस
आकर्षक व्यक्तित्व को देखकर दोस्त व दुश्मन सब खुश हो जाते थे। गिरफ़्तारी
के समय वे बहुत खुश थे। प्रायः कहा करते थे, “वीरता और हिम्मत से मरने पर
मुझे विद्रोही की उपाधि देना। कोई याद करे तो विद्रोही कर्तार सिंह कहकर याद
करे।” मुक़दमा चला। उस समय कर्तार सिंह की आयु कुल साढ़े अठारह वर्ष
थी। सबसे कम आयु के अपराधी आप ही थे, लेकिन जज ने इनके सम्बन्ध में
यह लिखा –
“वह इन अपराधियों में, सबसे ख़तरनाक अपराधियों में एक है। अमेरिका की
यात्रा के दौरान और फिर भारत में इस षड्यन्त्र का ऐसा कोई हिस्सा नहीं जिसमें
उसने महत्त्वपूर्ण भूमिका न निभायी हो।”
एक दिन आपके बयान देने की बारी आयी। आपने सबकुछ मान लिया। आप
क्रान्तिकारी बयान देते रहे। जज क़लम दाँतों के नीचे दबाये देखता रहा। एक शब्द
न लिखा। बाद में इतना कहा, “कर्तार सिंह, अभी आपका बयान लिखा नहीं गया।
आप सोच-समझकर बयान दें। आप जानते हैं कि आपके बयान का क्या परिणाम
हो सकता है?” देखने वाले कहते हैं कि जज के इन शब्दों को कर्तार सिंह ने बड़ी
मस्तानी अदा से केवल इतना कहा, “फाँसी ही तो चढ़ा देंगे, और क्या? हम इससे
नहीं डरते।” इस दिन अदालत की कार्रवाई समाप्त हो गयी। अगले दिन फिर कर्तार
सिंह का अदालत में बयान शुरू हुआ। पहले दिन जजों का कुछ ऐसा विचार था
142 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़