सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 146, कुल 788 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 146

सितम्बर, 1914 में कामागाटामारू जहाज़ को अत्याचारी गोरे साम्राज्यवादियों के
हाथ से अवर्णनीय यातनाएँ झेलने पर वैसे लौटना पड़ा। तब हमारे कर्तार सिंह,
क्रान्तिप्रिय गुप्ता और एक अमेरिकी अराजकतावादी जैक को साथ लेकर जापान
आये और कोबे में बाबा गुरदित्त सिंह जी से मिलकर सब बातचीत की। युगान्तर
आश्रम, सानफ़्रांसिस्को के ग़दर प्रेस में ‘ग़दर और ग़दर की गूँज’ और अन्य
बहुत-सी पुस्तकें छापकर बाँटी जाती रहीं। दिनोदिन प्रचार बढ़ता गया। जोश बढ़ता
गया। फ़रवरी, 1914 में स्टाकरन के पब्लिक जलसे में आज़ादी का झण्डा लहराया
गया और आज़ादी और बराबरी के नाम पर क़समें खायी गयीं। इस जलसे के मुख्य
वक्ताओं में कर्तार सिंह भी थे। सभी ने घोषणा की कि वह अपने ख़ून-पसीने की
कमाई एक-एक कर देश की आज़ादी के संघर्ष में लगा देंगे। इसी तरह दिन गुज़रते
रहे। अचानक यूरोप में प्रथम विश्वयुद्ध छिड़ने की ख़बर आयी। वे खुशी से फूले
नहीं समाते थे। एकदम सभी गाने लगे –
चलो चलें देश के लिए युद्ध करने,
यही आख़िरी वचन व फ़रमान हो गये।
कर्तार सिंह ने देश लौटने का ज़ोरों से प्रचार किया। फिर स्वयं जहाज़ पर सवार
होकर कोलम्बो (श्रीलंका) पहुँच गये। इन दिनों अमेरिका से पंजाब आने वाले प्रायः
डिफ़ेंस ऑफ़ इण्डिया क़ानून (डी.आई.आर.) की पकड़ में आ जाते थे। बहुत कम
सही-सलामत पहुँच पाते थे। कर्तार सिंह सही-सलामत आ गये। बड़े ज़ोरों से काम
शुरू हुआ। संगठन की कमी थी, लेकिन किसी तरह वह पूरी की गयी। दिसम्बर,
1914 में मराठा नौजवान विष्णु गणेश पिंगले भी आ गये। इनकी कोशिश से
श्री शचीन्द्रनाथ सान्याल और रासबिहारी पंजाब आये। कर्तार सिंह हर समय हर
जगह पहुँचते। आज मोगा में गुप्त मीटिंग है। आप वहाँ भी हैं। कल लाहौर के
विद्यार्थियों में प्रचार हो रहा है, आप फिर प्रथम पंक्ति में हैं। अगले दिन फ़िरोज़पुर
छावनी के सैनिकों से गाँठजोड़ हो रहा है। फिर हथियारों के लिए कलकत्ता जा रहे
हैं। रुपये की कमी का प्रश्न उठने पर आपने डाका डालने की सलाह दी। डकैती
का नाम सुनते ही बहुत-से लोग स्तम्भित रह गये, लेकिन आपने कह दिया कि
कोई भय नहीं है। भाई परमानन्द भी डकैती से सहमत हैं। उनसे पुष्टि करवाने की
ज़िम्मेदारी आप पर डाली गयी। अगले दिन बग़ैर उनसे मिले ही कह दिया, “पूछ
आया हूँ, वे सहमत हैं।” वे यह सहन नहीं कर सकते थे कि केवल रुपये की कमी
से विद्रोह की तैयारी में देरी हो।
एक दिन वे डकैती डालने एक गाँव गये। कर्तार सिंह नेता थे। डकैती चल
रही थी। घर में एक बेहद ख़ूबसूरत लड़की भी थी। उसे देखकर एक पापी आत्मा
का मन डोल गया। उसने ज़बरदस्ती लड़की का हाथ पकड़ लिया। लड़की ने
घबराकर शोर मचा दिया। कर्तार सिंह एकदम रिवाल्वर तानकर उसके नज़दीक
140 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़