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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 144, कुल 788 में से

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पृष्ठ 144

शहीद करतार सिंह सराभा
शहीद कर्तार सिंह सराभा को भगतसिंह अपना प्रेरणास्रोत मानते थे। वह उनका
चित्र अपने पास रखते थे और कहते थे, “यह मेरा गुरु, साथी व भाई है।” यह लेख
सम्भवतः 1928 के शुरू में प्रकाशित हुआ था। — स.
रणचण्डी के इस परम भक्त विद्रोही कर्तार सिंह की आयु अभी बीस वर्ष की भी
नहीं हुई थी कि जब उन्होंने स्वतन्त्रता-देवी की बलिवेदी पर अपना बलिदान दे
दिया। आँधी की तरह वह अचानक कहीं से आये, अग्नि प्रज्वलित की और सपनों
में पड़ी रणचण्डी को जगाने की कोशिश की। विद्रोह का यज्ञ रचा और आख़िर
वह स्वयं इसमें भस्म हो गये। वे क्या थे, किस दुनिया से अचानक आये और झट
कहाँ चले गये? हम कुछ भी न जान सके। 19 वर्ष की आयु में ही उन्होंने इतने
काम कर दिखाये कि सोचकर हैरानी होती है। इतनी जुर्रत, इतना आत्मविश्वास,
इतना आत्मत्याग और ऐसी लगन बहुत कम देखने को मिलती है। भारतवर्ष में ऐसे
इन्सान बहुत कम पैदा हुए हैं, जिनको सही अर्थों में विद्रोही कहा जा सकता है,
परन्तु इन गिने-चुने नेताओं में कर्तार सिंह का नाम सूची में सबसे ऊपर है। उनकी
रग-रग में क्रान्ति का जज़्बा समाया हुआ था। उनकी ज़िन्दगी का एक ही लक्ष्य,
एक ही इच्छा और एक ही आशा, जो भी था — क्रान्ति थी, इसीलिए उन्होंने
ज़िन्दगी में पाँव रखा और आख़िर इसीलिए इस दुनिया से कूच कर गये।
आपका जन्म 1896 में गाँव सराभा, ज़िला लुधियाना में हुआ था। आप
माता-पिता के इकलौते बेटे थे। अभी इनकी आयु बहुत कम थी कि पिताजी का
देहावसान हो गया। परन्तु आपके दादा ने बहुत प्रयत्न से आपको पाला। नवीं कक्षा
पढ़ने के बाद आप अपने चाचा के यहाँ चले गये। वहाँ उन्होंने दसवीं की परीक्षा
पास की और कॉलेज में पढ़ने लगे। यह 1910-11 के दिन थे। इधर आपको स्कूल
और कॉलेज के पाठ्यक्रम के तंग दायरे से बाहर की बहुत-सी पुस्तकें पढ़ने का
अवसर मिला। यह आन्दोलन का ज़माना था। इस वातावरण में रहकर आपकी
देशप्रेम की भावना पल्लवित हुई।
इसके बाद आपकी अमेरिका जाने की इच्छा हुई। घरवालों ने उसका कोई
विरोध नहीं किया। आपको अमेरिका भेज दिया गया। सन् 1912 में आप
138 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़