भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 142, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकह गये कि अब कामागाटामारू जहाज़ में सवार होकर भारत को लौट चलना
चाहिए। परन्तु उनका यह निश्चय जान सरकार ने जहाज़ को शंघाई में न ठहरने
दिया। उसके दो-एक रोज़ बाद वे सभी लोग दूसरे जहाज़ों द्वारा भारत लौट आये;
कामागाटामारू जहाज़ अभी हुगली में ही खड़ा था कि आप लोग कलकत्ते पहुँच
गये। वहाँ पर सरकार ने आपको पंजाब के टिकट देकर गाड़ी पर चढ़ा दिया।
अमृतसर पहुँचते न पहुँचते बजबज की घटना हो गयी। सब समाचार मिला। क्रोध
से विह्वल-से हो उठे। प्रतिहिंसा की ज्वाला धधक उठी। परन्तु डॉक्टर जी ने अपने
अन्य साथियों को समझा-बुझाकर कुछ शान्त किया, और उन्हें प्रचार-कार्य के
लिए उद्यत किया तथा स्वयं संगठन-कार्य शुरू कर दिया। उधर इस विराट चेष्टा
में आपको बम बनाने का कार्य सौंपा गया था। आप उसमें थे भी बड़े निपुण।
अमेरिका से सैकड़ों मतवाले योद्धा विप्लव-अग्नि भड़काने के लिए आने लगे।
झट-से सारा प्रबन्ध हो गया। विप्लव-दल का इतना वृहत संगठन खड़ा हो गया
कि समस्त भारत में एक साथ विद्रोह खड़ा कर देने का विचार उठा और तिथि
तक निश्चित हो गयी। देखते-देखते सब प्रयत्न, सब आयोजन विफल हो गये।
कृपाल की नीचता से सब किया-धरा बीच में ही रह गया। इधर-उधर
पकड़-धकड़ शुरू हो गयी। परन्तु आप पकड़े न गये। एक बार एक सरकारी
जासूस द्वारा आपको कहा गया कि यदि वे सरकारी गवाह बन जायें तो उन्हें क्षमा
के साथ ही साथ बहुत भारी पुरस्कार भी दिया जायेगा। तब आपने उस प्रस्ताव
को बिल्कुल उपेक्षा से ठुकरा दिया। फिर एक बार एक खुफ़िया ऑफ़िसर आपके
पास तक आ पहुँचा। परन्तु वह ख़ूब जानता था कि डॉक्टर साहब बड़े निर्भीक
क्रान्तिकारी हैं, अतः उसे अकेले उनको गिरफ़्तार करने का साहस न हुआ। उलटा
वह उनसे कहने लगा कि सरकार ने आपके लिए क्षमा प्रदान की है तथा पुरस्कार
देने का वचन दिया है, यही कहने के लिए आया हूँ। आप भी ख़ूब समझते थे
कि वह उस समय उन्हें पकड़ने का साहस न कर सकने के कारण ही ऐसी
बातें करता था। इसलिए आपने कुछ रज़ामन्दी दिखायी और उससे पीछा छुड़ाकर
बच निकले। इस तरह आपने समझा कि अब देश में बचकर रहना एकदम असम्भव
है, इसलिए आपने काबुल की ओर प्रस्थान कर दिया। वज़ीराबाद स्टेशन पर पुलिस
ने पकड़ लिया, परन्तु वहाँ पर आपने कुछ घूस दे दी और बच निकले। आप
कोहाट की ओर रवाना हो गये। पुलिस को भी समाचार मिल गया। कोहाट स्टेशन
पर पुलिस का बड़ा भारी दस्ता पहरे पर लगा दिया गया। उसी ट्रेन में बहुत-सी
पुलिस भी चढ़ा दी गयी। मार्ग में एकाएक सब डिब्बों की तलाशी भी ले डाली
गयी, परन्तु आप न पकड़े जा सके। कुछ दिन वहीं पर ठहरने के पश्चात आप
काबुल जा पहुँचे। वहाँ शीघ्र ही आप बहुत प्रसिद्ध हो गये। आपकी योग्यता देखकर
आपको काबुल का चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर नियुक्त कर दिया।
136 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़