भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 140, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंथी) भारतमाता को अन्तिम नमस्कार किया। भारत-स्वतन्त्रता का गान गाया।
हँसते-हँसते फाँसी के तख़्ते पर जा खड़े हुए। फिर क्या हुआ? क्या पूछते हो? वही
जल्लाद, वही रस्सी! ओह! वही फाँसी और वही प्राणत्याग!
आज बलवन्त इस संसार में नहीं, उनका नाम है, उनका देश है, उनका विप्लव
है।
फ़रवरी, 1928
डॉक्टर मथुरा सिंह
बावजूद सबसे अधिक विपत्तियाँ सहन करने के, सबसे अधिक गणना में अपने
नर-रत्नों के स्वतन्त्रता-बलिवेदी पर बलिदान देने के, आज पंजाब राजनीतिक क्षेत्र
में फिसड्डी (Politically backward) प्रान्त कहलाता है। बंगाल में श्री खुदीराम बसु
फाँसी पर लटके। उन्हें इतना उठाया गया कि आज उनका नाम उस प्रान्त के
कोने-कोने में सुनायी देता है। भारतवर्ष के प्रत्येक प्रान्त में उनका नाम सुविख्यात
है। परन्तु पंजाब में कितने रत्न देश के लिए जीवन-दान दे गये, कितने ही
हँसते-हँसते फाँसी पर चढ़ गये, कितने ही लड़ते-लड़ते छाती में गोली खाकर
शहीद हो गये, परन्तु उन्हें कौन जानता है? और कहीं की तो बात ही क्या कहें,
पंजाब प्रान्त में ही उन्हें कितने लोग जानते हैं? कोई साधारण विप्लवी यों ही फाँसी
पर लटक गया हो और उसे लोग यों ही भूल गये हों, सो भी तो नहीं। जिन लोगों
ने अथक परिश्रम से, अदम्य उत्साह से तथा अतुल साहस से भारतोत्थान के लिए
ऐसे-ऐसे यत्न कर दिये थे कि आज उन्हें सुन-सुनकर अवाक रह जाने के
अतिरिक्त और कोई चारा नहीं! यदि ऐसे रत्न किसी और देश में जन्म धारण किये
होते तो आज उनकी वाशिंगटन, गैरिबाल्डी तथा विलियम वालीस की भाँति पूजा
होती। परन्तु उन्होंने एक अक्षम्य अपराध यह किया था कि वे भारत में पैदा हुए
थे। इसी का दण्ड यह है कि आज उनको विस्मृति के अन्धकार में फेंक दिया गया
है। न उनके कार्य की चर्चा है, न उनके त्याग की, न उनके बलिदान की ख्याति
है, न उनके साहस की। परन्तु ऐसी कृतघ्नता दिखाने वाले देश की उन्नति कैसे
होगी?
कट्टर आदर्शवादी डॉक्टर मथुरा सिंह जी का स्थान वास्तव में बहुत ऊँचा है।
आपका जन्म सन् 1883 ई. में दुढियाल नामक गाँव, ज़िला झेलम (पंजाब) में
हुआ था। आपके पिता का नाम सरदार हरि सिंह था। आपने पहले अपने गाँव में
ही शिक्षा पायी, तत्पश्चात आप चकवाल के हाई स्कूल में पढ़ने लगे। आपकी बुद्धि
बड़ी तीक्ष्ण थी। आप सदैव अपने सहपाठियों में सबसे अच्छे रहते थे। वहाँ पर
मैट्रिक पास करने के बाद आप प्राइवेट तौर पर डॉक्टरी का कार्य सीखने लगे।
मैसर्स जगत सिंह एण्ड ब्रदर्स की दुकान रावलपिण्डी में थी। वहीं पर आपने यह
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