भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 138, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंथे, परन्तु ज़रा और सुनिये। श्री बलवन्त सिंह, श्री भाग सिंह ये दो ही सज्जन तो
थे, जो पहले दिन से इमिग्रेशन विभाग वालों से वीरतापूर्वक लड़ते चले आये थे।
कामागाटामारू जहाज़ के मामले में भी सभी कार्य इन्हीं दो सज्जनों ने तो किये थे।
वे इमिग्रेशन विभाग की आँखों के काँटे हो रहे थे। एक देशद्रोही भाड़े का टट्टू
मिल गया। गुरुद्वारे में दीवान हो रहा था। उस विभीषण ने ईश्वर-भजन में तल्लीन
श्री भाग सिंह और श्री बलवन्त सिंह पर पिस्तौल से फ़ायर कर दिये। श्री भाग सिंह
जी तो वहीं स्वर्गलोक सिधार गये, परन्तु श्री बलवन्त सिंह बच गये। गोली उनके
न लगकर एक और देशभक्त श्री वतन सिंह के जा लगी। वे भी वहीं शहीद हो
गये। यह हत्यारा उपस्थित लोगों के पंजे से बच गया। कैनेडा-सरकार का क़ानून
भी उसे कुछ दण्ड न दे सका। वह आज भी जीता है। वह पंजाब सरकार का
लाड़ला बना रहा है। उसने यह सब काण्ड क्यों किया और इसमें उसे क्या भलाई
दीख पड़ी, यह सब वही जाने!
इसी प्रकार की सरगर्मी से कितने ही महीने गुज़र गये। सन् 1914 का अन्तिम
पक्ष आ गया। महायुद्ध छिड़ चुका था। अमेरिका स्थित सब भारतीय देश में वापस
आने की तैयारी करने लगे। फिर हमारे नायक वहाँ कैसे ठहर सकते थे। सपरिवार
प्रस्थान कर दिया। आप शंघाई पहुँचे, वहीं आपके घर एक पुत्र भी उत्पन्न हुआ।
वहाँ कार्य के सम्बन्ध में आपको अपना घर लौटने का इरादा बदलना पड़ा। परिवार
तो श्री करतार सिंह के साथ भारत को भेज दिया और आप वहीं ठहर गये। वहाँ
जो सब कार्य करने को था, करते हुए आप 1915 में बेंकॉक (Bangkok) पहुँचे।
उन दिनों दूर पूर्व में जो विद्रोह के प्रयत्न हो रहे थे; उन्हीं के संगठन तथा
नियन्त्रण में आपको कार्य करने के लिए ठहरना पड़ा था। उन सब विफल आयोजनों
का रोमांचकारी इतिहास लिखने का यह स्थान नहीं। सप्ताहभर सिंगापुर में जो
रणचण्डी का ताण्डव-नृत्य हुआ था, उसमें साम्राज्यवादी जापान तथा फ्रांस की सर्व
शस्त्रसुसज्जित सेनाओं की सहायता से अंग्रेज़ विजयी हुए। भारत का स्वतन्त्रता प्रयत्न
निष्फल हो गया। Eastern Plot ख़त्म हो गया। ऐसी ही अवस्था में श्री बलवन्त
सिंह जी बेंकॉक पहुँचे थे। दुर्भाग्यवश आप बीमार हो गये। दशा नाजुक हो गयी,
अस्पताल जाना पड़ा। नासमझ डॉक्टर ने ऑपरेशन कर डाला और वह भी बिना
क्लोरोफ़ार्म सुँघाये ही। आपको कष्ट और निर्बलता बढ़ गयी। अभी चलने-फिरने
योग्य भी न हुए थे कि अस्पताल वालों ने उन्हें चले जाने को कहा। चलने-फिरने
की अयोग्यता की बात पर भी ध्यान नहीं दिया गया। अस्पताल से बाहर निकाल
दिया गया। इतना उतावलापन क्यों किया गया, सो भी सुन लीजिये। बाहर पुलिस
गिरफ़्तार करने के लिए खड़ी थी। द्वार से निकलते न निकलते आपको गिरफ़्तार
कर लिया गया। वहाँ रहने वाले भारतवासियों के जमानत-अमानत के सब प्रयत्न
विफल हो गये। स्याम (थाईलैण्ड) की स्वतन्त्र सरकार ने श्री बलवन्त सिंह जी
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