भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 129, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंशहीदों के जीवन-चरित्र
काकोरी के शहीदों को दिसम्बर, 1927 में फाँसी होने के बाद भगतसिंह ने
अपने साथियों - भगवतीचरण वोहरा, शिव वर्मा, जयदेव कपूर आदि - से
विचार-विमर्श करते हुए अपने देश के शहीदों व क्रान्तिकारी आन्दोलन सम्बन्धी
जानकारी देने के निरन्तर यत्न शुरू किये। वे स्वयं भी इन आन्दोलनों का गहराई से
अध्ययन कर रहे थे और देशवासियों को जागृत भी कर रहे थे।
फ़रवरी, 1928 में 'चाँद' का 'फाँसी अंक' प्रकाशित हुआ। भारतीय क्रान्तिकारी
आन्दोलन और शहीदों के जीवन-चरित्र सम्बन्धी इस अंक में 'विद्रोही' छद्म नाम
से भगतसिंह ने कई देशभक्तों के जीवन-चरित्र लिखे। यहाँ प्रस्तुत तीन जीवन-चरित्र
वहीं से लिये गये हैं। - स.
सूफ़ी अम्बा प्रसाद
आज भारतवर्ष में कितने लोग उनका नाम जानते हैं? कितने उनकी स्मृति में
शोकातुर होकर आँसू बहाते हैं? कृतघ्न भारत ने कितने ही ऐसे रत्न खो दिये और
क्षणभर के लिए भी दुख अनुभव नहीं किया।
वे सच्चे देशभक्त थे। उनके हृदय में देश के लिए दर्द था। वे भारत की
प्रतिष्ठा देखना चाहते थे, भारत को उन्नति के शिखर पर पहुँचाना चाहते थे, तो भी
आज भारत के बहुत कम लोग उनका नाम जानते हैं। उनकी क़दर भी की तो ईरान
ने, आज यहाँ आका सूफ़ी का नाम सर्वप्रिय हो रहा है।
सूफ़ी जी का जन्म 1858 में मुरादाबाद में हुआ था। आपका दाहिना हाथ जन्म
से ही कटा था। आप हँसी में कहा करते थे - अरे भाई! हमने सत्तावन में अंग्रेज़ों
के विरुद्ध युद्ध किया। हाथ कट गया। मृत्यु हो गयी। पुनर्जन्म हुआ, हाथ कटे का
कटा आ गया!
आपने मुरादाबाद, बरेली और जालन्धर आदि कई शहरों में शिक्षा पायी।
एफ़.ए. पास करने के पश्चात आपने वकालत पढ़ी, परन्तु की नहीं। आप उर्दू के
प्रभावशाली लेखक थे। आपने यही काम सँभाला।
सन् 1890 में आपने मुरादाबाद से जाम्युल इलूक नामक उर्दू साप्ताहिक पत्र
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 123