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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 128, कुल 788 में से

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पृष्ठ 128

खाने के लिए, उन्हें ओढ़ने के लिए किसी बात की कमी न थी। वे तो जो कुछ
करते थे, लोक-कल्याण की ख़ातिर, लोक-सेवा के लिए करते थे। वे इतने
बलिदान के पुंज निकले, कि स्वयं को हमारे ऊपर वार दिया। आइये, इन वीरों को
प्रणाम करें।
मातृभूमि के लाड़लो! क्या हुआ यदि डर के मारे आज हम आपका नाम भी
लिखने से घबराते हैं? क्या हुआ जो आज हम दिल की बातें कहने में झिझकते
हैं? क्या हुआ यदि आज हिन्दुस्तान में मुर्दानोशी छायी है और आपका नाम लेने से
ही षड्यन्त्रकारी बन जाते हैं? क्या हुआ यदि कोई हिन्दुस्तानी आपको भला-बुरा
भी कहे, लेकिन समय आयेगा जब आपकी क़द्र होगी, जब आपको शहीद कहा
जायेगा, जिस तरह 1857 के ग़दर को अब 'आज़ादी की जंग' कहा जाता है। समय
सिद्ध कर देता है, समय सच्ची-सच्ची कहलवा देता है, समय किसी का लिहाज़
नहीं करता। उस समय आप अपनी असली शान से चमकेंगे और उस समय
हिन्दुस्तान आप पर बलिहारी जायेगा।
शहीद वीरो! हम कृतघ्न हैं, हम तुम्हारे किये को नहीं जानते। हम कायर हैं,
हम सच-सच नहीं कह सकते। हमें आप माफ़ करो, हमें आप क्षमादान दो। हमें
मौत से भय लगता है, हमारा दिमाग़ सूली का नाम सुनते ही चक्कर खा जाता है।
आप धन्य थे। आपके बड़े जिगर थे कि आपने फाँसी को टिच्च समझा। आपने मौत
के समय मज़ाक़ किये! पर हम? हमें चमड़ी प्यारी है, हमें तो ज़रा-सी तकलीफ़
ही मौत बनकर दिखने लगती है। आज़ादी! आज़ादी का तो नाम सुनते ही हमें
कँपकँपी छिड़ जाती है। हाँ! गुलामी के साथ हमें प्यार है, गुलामी की ठोकरों से
हमें मज़ा आता है! आपकी नस-नस से, रग-रग से आज़ादी की पुकार गूँजती थी
लेकिन हमारी रग-रग से, हमारी नस-नस से, गुलामी की आवाज़ निकलती है।
आपका और हमारा क्या मेल? हमें आप क्षमा करो, आप हमारे केवल यह प्रेम के
अश्रु ही स्वीकार करो।
कहो, धन्य हैं, काकोरी के शहीद...!
122 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़