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भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)

Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates

शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा

DevanagariHindipublished788 पृष्ठ

पृष्ठ 126, कुल 788 में से

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पृष्ठ 126

यह ज़ुल्म कब तक रहेगा? इस अन्याय का भाण्डा कब फूटेगा? बेगुनाहों को
कब तक शहीद किया जायेगा? देश-प्रेमियों को कब तक गोली का निशाना बनाया
जायेगा? कब तक इस गुलामी डायन का और मुँह देखना पड़ेगा? आज़ादी देवी के
दर्शन कब तक होंगे? अभी कितनी शहीदियाँ प्राप्त करनी होंगी। अभी और कितनों
को फाँसी पर चढ़ाया जायेगा?
रब्बा! वह दिन कब आयेगा, जब ये शहीदियाँ रंग लायेंगी। ईश्वर, वह दिन कब
देखेंगे जब हमारा बग़ीचा हरा-भरा होगा? यहाँ से पतझड़ का कूच कब होगा? उल्लू
कब तक इस बाग़ में डेरा जमाये बैठे रहेंगे? बुलबुलें किस दिन फिर यहाँ
चहचहायेंगी? ये पिंजरे कब टूटेंगे? आज़ादी कब लौटेगी, उजड़े कब फिर बसेंगे?
लोगो! भारतमाता के चार सुन्दर जवान फाँसी चढ़ा दिये गये। वे नौकरशाही के
डसे, दुश्मनी का शिकार हो गये। कौन बता सकता है कि यदि वे जीवित रहते तो
क्या-क्या नेकी के काम करते, कौन-कौन से परोपकार करते? कौन कह सकता
है कि उनके रहने से संसार पहले से सुन्दर और रहने योग्य न दिखायी देता? वे
वीर थे, आज़ादी के आशिक़ थे। उन्होंने देश और क़ौम की ख़ातिर अपनी जान लुटा
दी। वे अपनी माँओं की कोख को सफल बना गये।
यदि भारतमाता आज़ाद होती तो इनके बलिदानों का मोल पड़ता। यदि आज
हिन्दुस्तान में कुछ जान होती तो ये बलिदान बेकार न होते। हाय! आज़ादी के वीर
चले गये। उन्हें किसी ने न पहचाना, उन्हें किसी ने न कहा, आप शूरवीर हो, आप
बहादुर हो। वह जगह धन्य है, जहाँ आप जन्मे-पले! जहाँ आप खेले। वे राहें धन्य
हैं, जहाँ आप चले, जहाँ आप कूदे-भागे। वीर, मातृभूमि के लाड़ले वीर चले गये!
वे अपना जन्म सफल कर गये!
बातें करनी आसान हैं, बड़कें मारनी आसान हैं। चगल-चगल करना और बात
है, कुर्बानी देना और बात है। परीक्षा अलूणी चट्टान है, इसे चाटना आसान नहीं
है। परीक्षा से बड़े-बड़े तौबा कर उठे थे। परीक्षा के आगे कोई ज़िगर वाला ही टिक
सकता है। इन वीरों ने किस हिम्मत, किस बहादुरी से परीक्षा दी है। इनकी बहादुरी
कभी भूल सकती है? धन्य हैं इनके माँ-बाप, जिन्होंने उन्हें जन्म दिया। धन्य हैं
ये स्वयं, जो बलिदान के पुंज, आत्मत्याग की मिसाल हैं।
जब कभी आज़ादी का इतिहास लिखा जायेगा, जब कभी शहीदों का ज़िक्र
होगा, जब कभी भारतमाता के लिए बलिदान करने वालों की चर्चा होगी तो वही

  1. राजिन्द्रनाथ लाहिड़ी 2. रामप्रसाद बिस्मिल, 3. रोशन सिंह और 4. अशफ़ाक़उल्ला
    का नाम ज़रूर लिया जायेगा। उस समय आने वाली पीढ़ियाँ इन शहीदों के आगे
    शीश झुकायेंगी और इन वीरों के बहादुरी भरे क़िस्से सुन-सुन सिर हिलायेंगी। उस
    समय ये क़ौम का आदर्श माने जायेंगे, इन बुजुर्गों की पूजा होगी।
    आज हम कमज़ोर हैं, निःशक्त हैं। आज हम गिरे हुए हैं, झूठे हैं। आज हम
    120 / भगतसिंह और उनके साथियों के सम्पूर्ण उपलब्ध दस्तावेज़