भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 125, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंकाकोरी के शहीदों के लिए
प्रेम के आँसू
जनवरी, 1928 के 'किरती' ने काकोरी के शहीदों सम्बन्धी एक सम्पादकीय
नोट भी प्रकाशित किया। यह भगतसिंह का लिखा हुआ तो नहीं है, लेकिन उनके
साथी भगवतीचरण वोहरा का हो सकता है। निश्चय ही, यह भी ऐतिहासिक दस्तावेज़
है, जिसे नीचे दिया जा रहा है। – स.
काकोरी केस के चार वीरों को फाँसी पर लटका दिया गया। वे लाड़-प्यार से पले
शूरवीर हँसते-हँसते शहादत प्राप्त कर गये। भारतमाता के चार सुपुत्र अपने शीश देश
और राष्ट्र के नाम अर्पण कर गये। उन्होंने अपनी प्रतिज्ञा, अपना फ़र्ज़ पूरा कर दिया।
वे इस पंच भौतिक शरीर की क़ैद से आज़ाद हो गये और हम गुलामों को अपनी
गुलामी के दुखड़े रोने के लिए पीछे छोड़ गये!!!
जिस देश में देशभक्ति गुनाह समझा जाता हो, जिस देश में आज़ादी की
ख़्वाहिश रखना बग़ावत समझा जाता हो, जहाँ लोककल्याण की सज़ा मौत हो, जहाँ
देशभक्तों की गर्दन में फाँसी का रस्सा डाला जाता हो, उस देश की हालत ख़्याल
में तो भले ही आ जाये, लेकिन बयान नहीं की जा सकती। किसी देश की
अधोगति इससे ज़्यादा क्या हो सकती है। लेकिन जिस देश में यह अन्याय नित्य
प्रति होते हों, जहाँ ऐसे अत्याचार दिन-प्रतिदिन ही होते रहें यदि वहाँ के निवासी
ऐसे-ऐसे अन्यायों, ऐसे अत्याचारों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानी तो दूर, आह तक न
भर सकते हों तो उस देश के निवासियों की हालत कैसी होगी?
हिन्दुस्तान गुलाम है। इसकी बागडोर विदेशियों के हाथ है। इससे प्रेम करना
मौत को पुकारना है। इसकी आज़ादी के सपने देखना घर-बार, बाल-बच्चे छोड़कर
जलावतनी की ज़िन्दगी गुज़ारना है। इस महीवाल के प्रेम ने कई सोहनियों को गहरे
समुद्रों में डुबोया। इसके प्रेम ने कई प्रेमियों के दल के दल ख़त्म किये। इसका
प्रेम अगाध है, अथाह है। इसके प्रेमी बेअन्त हैं, असंख्य हैं। न इस प्रेम का स्वर
पता चलता है, न इसके प्रेमियों को ताव आती है। यहाँ तो 'चुप भाई चुप' वाली
बात है।
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 119