भगत सिंह और उनके साथियों के संपूर्ण उपलब्ध दस्तावेज (प्रो. चमनलाल - प्रामाणिक ऐतिहासिक संकलन)
Complete Available Documents of Bhagat Singh & Associates
शहीद-ए-आजम भगत सिंह (सम्पादक: प्रो. चमनलाल) द्वारा
पृष्ठ 109, कुल 788 में से
संदर्भ में पढ़ेंसिंह गड़गज्ज के नाम भी वारण्ट निकला। मगर वे भी तो उसी दल के थे। उन्होंने
भी गिरफ़्तार होना स्वीकार नहीं किया। पुलिस हाथ धोकर पीछे पड़ गयी, पर फिर
भी वे बचते ही रहे। उनका संगठित किया हुआ अपना एक क्रान्तिकारी दल था।
निहत्थों पर किये जाने वाले अत्याचार को वे सहन न कर सके। इस शान्तिपूर्ण
आन्दोलन के साथ-साथ उन्होंने शस्त्रों का प्रयोग भी ज़रूरी समझा।
एक ओर कुत्ते, शिकारी कुत्ते, उनको खोज निकालने के लिए सूँघते फिरते थे,
दूसरी ओर निश्चय हुआ कि खुशामदियों (झोलीचुक्कों) का सुधार किया जाये।
सरदार किशन सिंह जी कहते थे, अपनी रक्षा के लिए हमें सशस्त्र ज़रूर रहना
चाहिए, पर अभी कोई और क़दम न उठाना चाहिए। परन्तु बहुमत दूसरी ओर था।
अन्त में फ़ैसला हुआ कि तीन व्यक्ति अपने नाम घोषित कर दें और सारी ज़िम्मेदारी
अपने ऊपर ले लें तथा झोलीचुक्कों का सुधार शुरू कर दें। श्री कर्म सिंह, श्री धन्ना
सिंह तथा श्री उदय सिंह जी आगे बढ़े। यह उचित था अथवा अनुचित, इसे एक
ओर हटाकर ज़रा उस समय की कल्पना तो कीजिये, जब इन नवीन वीरों ने शपथ
ली थी –
‘हम देश-सेवा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर देंगे, हम प्रतिज्ञा करते हैं कि
लड़ते-लड़ते मर जायेंगे, मगर जेल जाना मंज़ूर न करेंगे।’
जिन्होंने अपने परिवार का मोह त्याग दिया था वे लोग जब ऐसी शपथ ले रहे
थे, उस समय कैसा सुन्दर, मनोरम, पवित्रता से परिपूरित दृश्य रहा होगा! आत्मत्याग
की पराकाष्ठा कहाँ है? साहस और निर्भीकता की सीमा किस ओर है?
आदर्शपरायणता की चरमता का निवास किधर है?
श्याम चुरासी, होशियारपुर ब्रांच रेलवे लाइन के एक स्टेशन के निकट सबसे
पहले एक सूबेदार पर हाथ साफ़ किया गया। उसके बाद इन तीनों व्यक्तियों ने
अपने नाम भी घोषित कर दिये। सरकार ने पूरी ताक़त लगाकर इन्हें पकड़ने की
कोशिश की, मगर सफलता न मिली। रुड़की कलाँ में सरदार किशन सिंह
गड़गज्ज घिर गये। उनके साथ एक और युवक भी था जो वहीं घायल होकर
पकड़ा गया। परन्तु किशन सिंह वहाँ से भी अपने शस्त्रों की सहायता से बच
निकले। रास्ते में उन्हें एक साधु मिला। उसने उन्हें बताया कि उसके पास एक
ऐसी बूटी है कि जिसकी सहायता से मनचाहा काम आसानी से किया जा सकता
है। भ्रम में फँसकर एक दिन वे अपने शस्त्र रखकर इसी साधु के पास गये। कुछ
दवाई रगड़ने को देकर साधु बूटी लेने गया और पुलिस को ले आया। सरदार
साहब पकड़ लिये गये। वह साधु सी.आई.डी. विभाग का सब-इंस्पेक्टर था।
बब्बर अकाली वीरों ने अपना काम ख़ूब ज़ोरों के साथ शुरू कर दिया। कितने ही
सरकार के सहायक मार डाले गये। दोआब – व्यास और सतलुज के बीच में,
जालन्धर और होशियारपुर का ज़िला पहले ही भारत के राजनीतिक मानचित्र में
विरासत से साक्षात्कार : भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन / 103