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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

Devanagarihipublished122 पृष्ठ

44. साहिब जी को क्रूश पर खड़ा किया जाना

102 साहिब बन्दगी

(44) साहिब जी को क्रूश पर खड़ा किया जाना

बार-बार साहिब की इतनी कसनियाँ लेने के बाद भी मूर्ख पाखण्डियों को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि साहिब तो इंसान ही नहीं हैं। उनका शरीर तो मात्र देखने के लिए है असल में वो तो शब्द सरुपी हैं। वे अभी भी साहिब को जादूगर समझकर मिटाने का प्रयास कर रहे थे। सबने मिलकर विचार किया कि कबीर को क्रूश पर खड़ा करके कीलें ठुकवाकर मार देते हैं। जब यह षडयंत्र शेख तकी को मालम हुआ तो वो बड़ा खुश हुआ। उसने इस योजना को मान लिया। शेख तकी साहिब के पास गया और उन्हें अपने साथ क्रूश वाले स्थान पर ले आया। वहाँ पहुँचकर तकी ने साहिब से कहा कि आप इस क्रूश पर खड़े हो जाओ। बेखौफ साहिब भी मानो इसी इंतज़ार में थे, क्योंकि वे तो लोगों को यही बताना चाह रहे थे कि देख लो, ये धार्मिक पाखण्डी असल में कितने क्रूर हैं, कितने धोखेबाज हैं। हुक्म पा कर जब साहिब उस क्रूश पर खड़े हो गये तो तकी ने अपने सिपाहियों को हुक्म दिया कि काँटों की टोपी कबीर के सिर पर रख कर हाथों और पाँव में कीलें ठोक दो। शेख तकी के हुक्म का पालन हुआ। इस बार भी शेख तकी की योजना विफल हो गई। यह योजना भी साहिब का कुछ न बिगाड़ सकी। उसकी ईर्ष्या अग्नि ज्वाला की तरह बढ़ रही थी।

साहिब मारन को रल पाखण्डी, एक नया परपंच रचाया।
क्रूश पर खड़ा कर साहिब को, काटों का टोप पहिनाया॥
साहिब का तो कुछ न बिगड़ा, पाखिण्डयों का मुख मुरझाया॥

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