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सर्वकोश
बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 361, कुल 408 में से

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पृष्ठ 361

आदर्शों का संघर्ष / 359

के साथ मेरा परिचय हुआ। सूर्यकान्त सेन इस दल के प्रमुख नेता थे। इनके दो-
तीन विश्वस्त साथियों से मेरी बातचीत हुई थी। यह दल अनुशीलन समिति की
ही एक शाखा थी। अनुशीलन समिति की नीति से ऊबकर इस दल ने उस समिति
से अपने को अलग कर लिया था। यह दल भी मेरी ही तरह उस नीति का पक्ष-
पाती था। इन लोगों से बातचीत करके मैंने ऐसा अनुभव किया कि इनसे मेरी
पट जाएगी। श्री सूर्यसेन के विश्वस्त आदमियों से मेरी बहुत कुछ बातचीत हो
गई। कलकत्ता के अन्य दल के भी कुछ व्यक्ति चटगांव के दल के साथ काम करने
लगे थे। इनसे भी मेरी बातचीत हुई। इन सब बातचीतों के परिणाम में उत्तर-
भारत के दल के साथ इनका सम्पर्क हो गया और जब दक्षिणेश्वर में एक बम
का कारखाना पकड़ा गया तो उसमें हमारे दल के प्रमुख कार्यकर्ता अमर शहीद
राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी भी गिरफ्तार हुए थे। मैं चाहता था कि हम कलकत्ता के दूसरे
क्रान्तिकारी दलों को भी अपने साथ मिलाकर एक विराट दल बना लें। इस कार्य
के सम्बन्ध मे मैं बहुत-से दलों के कार्यकर्ताओं से मिला दूसरी ओर मैंने यह निश्चय
कर लिया कि क्रान्तिकारी दल की ओर से परचे बाँटे जाएँगे। मैं चाहता था कि
पहले पर्चे में क्रान्तिकारी आन्दोलन के कार्यक्रम की एक रूपरेखा अंकित हो
जाय। मेरे प्रति घड़ी के कार्य के अन्तराल मे यह भावना सदा बनी रहती थी कि
अपने पर्चे में किस ढंग से अपने वक्तव्य को प्रभावोत्पादक ढंग से कहूँ। एक दिन
मैं अपने एक साथी के मकान में बैठा था। उनके बड़े भाई भी उस कमरे में बैठे
थे जो कलकत्ता के एक कालेज के इतिहास के प्रोफेसर थे। उन्हें यह पता था कि
मैं क्रान्तिकारी हूँ। योंही बातचीत होते-होते हिंसा-अहिंसा पर बातचीत चल
पड़ी। इस सिलसिले में उक्त प्रोफेसर महोदय ने आयरलैंड के इतिहास की एक
महत्त्वपूर्ण बात मुझे बताई। ग्रैण्ट राबर्टसन लिखित एक अंग्रेज़ी इतिहास ग्रन्थ से
उन्होंने ये वाक्य मुझे दिखाए—"English statesmen have taught the
Irish politicians that England can be bullied but not argued
into justice and generosity."
(अंग्रेज़ राजनीतिज्ञों ने आयरलैंड के नेताओं को यह सिखाया है कि इंग्लैंड
के इशारे से ही नीति के रास्ते पर लाया जा सकता है न कि युक्ति और तर्क की
सहायता से) इस किताब का नाम था 'England under Hatanoverians."
इसे मैंने अपने नोटबुक में नोट कर लिया। इटली के स्वाधीनता संग्राम के इतिहास
को भी मैंने अच्छी तरह से पढ़ लिया था। इटली के इतिहास की बहुत-सी बातें
रह-रहकर मेरी चेतना पर बार-बार आघात करती थी। एक दिन मैंने स्वर्गीय
लाला हरदयाल लिखित एक लेख पढ़ा। उसमें बाइबिल से कुछ वचन उद्धृत हुए
थे। मुझे वे पसन्द आए। उन वाक्यों को भी मैंने नोट कर लिया। उन दिनों मैं
नीत्से को भी पढ़ा करता था। उनके ग्रन्थ की एक बात मुझे बहुत पसन्द आयी :
"Chaos is necessary to the birth of new star." (नवीन तारे के जन्म
के लिए भीषण बवंडर और उथल-पुथल अत्यावश्यक है) इसे भी मैंने नोट कर