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बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)

Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal

शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा

DevanagariHindipublished408 पृष्ठ

पृष्ठ 362, कुल 408 में से

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पृष्ठ 362

360 / बन्दी जीवन

लिया । इस प्रकार पढते समय, घूमते समय, किसी से बात करते समय, किसी के
पास आते-जाते समय, प्रतिक्षण मैं उक्त क्रान्तिकारी पर्चे में लिखने के विषय में
सोचता रहता था।
एक ओर जैसे मै विभिन्न क्रान्तिकारी दलों के कार्यकर्ताओं से बातचीत चला
रहा था और इसके साथ-साथ पर्चे छपवाने का भी प्रबन्ध कर रहा था दूसरी ओर
वैसे ही मैं जापान, फ्रांस एवं अमेरिका (United States) में उपर्युक्त कार्यकर्ताओं
को गुप्त रीति से भेजने का भी प्रबंध कर रहा था। इसके दो उद्देश्य थे। हम
चाहते थे कि हमारे कुछ कार्यकुशल आदमी विदेश में जाकर वैज्ञानिक रीति से
सामरिक विभाग की विभिन्न शिक्षाएँ प्राप्त कर लें। हम चाहते थे कि सामरिक
शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ दूसरे आदमी गोला-बारूद तोप आदि बनाने के
कारखानों का काम चलाना भी सीख लें। कारण विप्लव के समय अस्त्र-शस्त्र
बनाने का काम आदि हमारे हाथ में नही रहता है तो आधुनिक युग में खुले विद्रोह
को अधिक दिन तक चलाना सम्भव नहीं है। दूसरी बात यह थी कि विदेशो में
जहाँ-जहाँ भारतीय विप्लव का सगठन किया जा रहा था उन स्थानों