बन्दी जीवन (शचीन्द्रनाथ सान्याल - भारतीय क्रान्तिकारियों की गीता, ब्रिटिश सरकार द्वारा प्रतिबन्धित)
Bandi Jeevan by Sachindra Nath Sanyal
शचीन्द्रनाथ सान्याल द्वारा
पृष्ठ 322, कुल 408 में से
संदर्भ में पढ़ें320 / बन्दी जीवन
हो गया। सम्भवतः वह जापानी देखना चाहता था कि हम भारतवासी कितने
गिरे हुए हैं। मेरे दिल में भावना बनी रही कि कही उसे जापान जाकर हम लोगों
की बुराई करने का मोका न मिले।
भोर होते ही ग्वालंद पहुँचे। इसके पहले मैं ग्वालंद कभी नही आया था।
वहाँ जो दृश्य मैंने देखा ऐसा दृश्य इसके पहले कभी नही देखा था। रेलवे लाइन
के लिए जितनी भूमि की आवश्यकता थी उसे छोड़कर चारों दिशाओं में पानी ही
पानी दिखाई दिया मानो एक समुद्र के बीच में आकर गाड़ी ठहर गई हो। जहाँ
पर गाड़ी आकर ठहरी उसके आसपास पानी में दो-चार झोपड़ियां इधर-उधर
दिखाई दी। एक टिकटघर है तो दूसरा मालगोदाम का दफ्तर, कही पानी अधिक
है कही कम। पछाहँ की ओर जैसे प्रत्येक बड़े स्टेशन पर गर्म पूड़ियां मिल सकती
हैं वैसे बंगाल में दो स्टेशनो को छोड़कर और कही नही मिल सकती। लेकिन
यहाँ के स्टेशनों पर बंगाली मिठाइयाँ मिल जाती हैं। ग्वालंद मे हम लोग स्टीमर
पर सवार हुए।
ढाका पहुँचकर जिस मकान मे आकर ठहरे वहाँ पर क्रान्तिकारी गण छिपे
हुए रहते थे एव जाली नोट बनाने के लिए नाना प्रकार के प्रयत्न कर रहे थे।
मुझे इस बात का पता था क्योकि अनुशीलन समिति के नेताओ के साथ इसके
पहले अर्थ-संग्रह के बारे मे मेरा बहुत-कुछ वाद-विवाद हो चुका था। मेरा कहना
था कि इस देश में रहकर जाली नोट बनाने मे हम लोग सफल नही हो सकते।
यदि नोट बनाना ही है तो विदेश मे जाकर आधुनिकतम वैज्ञानिक प्रणालियो द्वारा
बनाने की चेष्टा होनी चाहिए। मै किसी और उग्र कार्यक्रम पक्षपाती था। इस
मकान मे नोट बनाने के काम को देखकर कुछ आशा तो अवश्य उत्पन्न हुई और
उसके साथ मन मे कुछ ईर्ष्या का भी उद्रेक हुआ कि कही ये लोग बाजी न मार
ले जायें परन्तु नोट के एक-आध नमूने को देखकर मुझे यह भरोसा न हुआ कि ये
लोग नोट बनाने में कृतकार्य हो सकेंगे और अन्ततः यही बात हुई भी। नोट बने
लेकिन काम के नही थे।
अनुशीलन समिति के एक विशिष्ट नेता श्री त्रैलोक्य नाथ चक्रवर्ती से मेरी
खूब बातचीत हुई। मेरी शिकायतों का औचित्य उन्होने स्वीकार किया एव यह
वादा किया कि भविष्य मे ऐसी शिकायतो का अवसर आपको नही मिलेगा।
उनकी बातचीत से मुझे पूर्ण सन्तोष हुआ। ये बहुत सरल एवं सहज स्वभाव के
व्यक्ति हैं और जैसा कहते हैं वैसा ही करते हैं। अण्डमन मे रहते समय जिस
वीरता के साथ इन्होंने मेरा साथ दिया था अनुशीलन के और किसी व्यक्ति ने
ऐसा नही किया। अब मैं अनुशीलन समिति के साथ मिलकर काम करने को
तैयार हो गया।
अब यह तय हो गया कि मैं अनुशीलन समिति के साथ मिलकर काम करूँगा
और हमारे दोनों दलों के मिलने के बाद इसके नियन्त्रण मे मुझसे कुछ छिपाया न
जाएगा। त्रैलोक्य बाबू ने योगेश बाबू के लिए मेरे हाथ एक पत्र भेजा था और