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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 491, कुल 530 में से

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पृष्ठ 491

कुण्ठतयाऽनुष्ठानाभावप्रसङ्गात् । तथा च धर्माभावे तत्कार्यस्य
सुखस्याप्यभावे रागानुत्पत्तौ लोकसमीहोच्छेदे लोकोच्छेद-
प्रसङ्गः ।
तस्मान्महाजनपरिगृहीतपूर्वपूर्वागमपूर्वकत्वात्, प्रवाहनित्य-
त्वाद् वा, प्रलयविच्छेदे सर्गादौ सर्वानुविधेयपुरुषधौरेयपूर्वकत्वाद्
वा महाजनपरिग्रहो न तु पूर्वागममानपेक्ष्यार्वाचीनपुरूषपशुपूर्वकत्वात्
पूर्वागमप्रामाण्याप्रामाण्ययोरुभयथाऽपि तस्य विप्रलम्भकत्वात् ।
प्रामाण्ये हि तद्विरुद्धाभिधानं विप्रलम्भ एव । अप्रामाण्येऽप्यु-
नहीं—क्योंकि यदि पूर्ववर्ती वेद न होता तो धर्मके विषयमे अर्थात् याग
दानादिकी इष्टसाधनतामे अन्य प्रमाण कुण्ठित हैं, इसलिये धर्मानुष्ठानका
अभाव हो जायगा । ऐसी स्थितिमें धर्मका अभाव होनेपर उससे उत्पन्न
होनेवाले सुखका भी अभाव हो जायगा और सुखके अभावमें उसकी
अनुभूति नहीं होनेके कारण पुन सुखप्राप्तिके प्रति राग नहीं उत्पन्न
होगा तथा रागके अभावमे प्रवृत्ति नहीं होनेसे जगत् निश्चेष्ट हो जायगा
और चेष्टाहीन हो जानेसे पुत्रादिकी उत्पत्ति भी नहीं हो सकेगी । इस
प्रकार जगत्का ही उच्छेद हो जायगा ।
अतः महाजनपरिगृहीत जो पूर्व पूर्व आगम, तत्पूर्वक होनेके कारण
या तत्तद् आगमोंके अनित्य होनेपर भी आगमधाराके नित्य होनेके
कारण अथवा प्रलयके द्वारा आगमधाराका विच्छेद हो जानेपर भी सृष्टि
के आदिमें किसी पुरुषविशेषसे निर्मित होनेके कारण ही कोई आगम
महाजनपरिगृहीत माना जाता है, न कि पूर्व आगमोंकी बिना अपेक्षा
किये आधुनिक-जनद्वारा प्रणीत होनेके कारण कोई भी आगम महाजन
परिगृहीत कहा जाता है । इनमे प्रथम पक्षके अनुसार पूर्व आगम जो
वेद, उसका प्रामाण्य मानकर या अप्रामाण्य मानकर, दोनों ही दशाओंमें
संसारमोचकागमोंका प्रणेता आधुनिक पुरुष विप्रलम्भक ( ठगनेवाला )
ही सिद्ध होता है । क्योंकि पूर्ववर्ती आगम वेदको यदि प्रमाण मानता
है तो उसके विरुद्ध कहना ठगना ही है । यदि उस पूर्ववर्ती आगम
वेदको अप्रमाण मानता है तो, "यागादिक स्वर्गादि सिद्धिका उपाय है" इस