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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 465, कुल 530 में से

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पृष्ठ 465

अनुपलम्भवादः ४१५
कर्तव्यो वा ? विपर्ययाविरोधबाधकाभ्याम् । किं बाधकम् ?
अन्वयव्यतिरेकभूयोदर्शनसाहायकमाचरन्नुत्तरस्तर्कः ।
स चाऽऽत्माश्रयेतरेतराश्रयचक्रकानवस्थानिष्टप्रसङ्गभेदेन
पञ्चविधोऽपि क्वचिद् व्यभिचारं निराकुर्वाणः क्वचित् तन्नि-
बन्धनमुपाधिमवधुन्वन् सहायोभवतीति फलतो न कश्चिद् विशेषः ।
तदुदाहरणानि चात्रैव यथायथं परिचेयानीति ।
प्रश्न—उक्त लक्षणवाले उपाधिका ज्ञान कैसे होगा ? अथवा उसका
निराकरण ( अभावज्ञान ) कैसे होगा ?
उत्तर—विपर्यय ( विपक्ष ) में अविरोध ( बाधकाभाव ) होनेसे
उपाधिका ज्ञान होता है तथा विपक्षमे बाधक होनेसे अनौ-
पाधिकत्वका ज्ञान होता है ।
प्रश्न—विपक्षमे जिसके होनेसे हेतुमे अनौपाधिकत्वका ज्ञान होता
है, वह बाधक क्या है ?
उत्तर—अन्वयव्याप्ति और व्यतिरेकव्या