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सर्वकोश
आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

आत्मतत्त्वविवेक / बौद्धधिक्कार (उदयनाचार्य - महामहोपाध्याय पं. केदारनाथ त्रिपाठी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सहित)

Atmatattvaviveka of Udayanacharya

आचार्य उदयन (व्याख्याकार: पं. केदारनाथ त्रिपाठी) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 353, कुल 530 में से

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पृष्ठ 353

३०४ आत्मतत्त्वविवेके

चासौ स्वात्मन्यपि निश्चय इति वधूमापमापनवृत्तान्त-
मनुहरति ।
छिदादिवदिति तु दृष्टान्तमात्रेण नास्मदवधानम् । "ज्ञानं
न ज्ञानान्तरकर्म, सजातीयक्रियात्वात्, या यज्जातीया क्रिया
नासौ तत्क्रियाकर्म, यथा छिदा छिदान्तरस्ये"ति तु न्याय-
विप्लवः । छिदावत् सर्वथा सजातीयाकर्मत्वे साध्ये बाधित-
विषयत्वात्, पुरुषान्तरज्ञानस्य च पुरुषान्तरज्ञानवेद्यत्वात्,

है, यह बात स्वप्रकाशवादी भी मानता है । ऐसी परिस्थितिमें यहाँ
ज्ञानके दृष्टान्तसे अर्थनिश्चय भी नहीं हो सकेगा। यह बात स्वतः
ग्राह्यत्ववादीको नहीं सूझती है । इस प्रकार यह उड़द मापनेवाली वधूके
वृत्तान्तके तुल्य है । अर्थात् जैसे उड़द तोलनेमें व्यग्र कोई वधू अपने
गुह्याङ्गको ढकने का ख्याल न रखे वैसे तुम भी ज्ञानको स्वप्रकाश सिद्ध
करनेकी व्यग्रतामे अपने ऊपर आनेवाले दोषाके समाधानका भी ख्याल
नहीं रखते हो।
जो तो छिदा क्रियाका दृष्टान्त दिये हो, उस दृष्टान्तमात्रसे हमें
सन्तोष नहीं हो सकता है । क्योंकि बिना हेतु दिये केवल दृष्टान्तमात्रसे
कुछ सिद्ध नहीं होता।
यदि कहो कि-ज्ञान अन्यज्ञानका कर्म नहीं हो सकता है, उसी
जातिकी क्रिया होनेके कारण, जो जिस जातिकी क्रिया होती वह उस
क्रियाका कर्म नहीं होती, जैसे छिदाक्रिया अन्य छिदाक्रियाका कर्म नहीं
होती है-तो यह न्याय नहीं है, न्यायाभास है। क्योंकि छिदाक्रियाके
दृष्टान्तसे ज्ञानमे भी सर्वथा सजातीय (ज्ञान) क्रियाका अकर्मत्व सिद्ध
करनेमे बाध नामक हेत्वाभास हो जाता है। क्योंकि अन्य पुरुषका
ज्ञान अन्यपुरुषीय ज्ञानका विषय होता है तथा अपना ज्ञान भी अपने
ही स्मरणात्मक आदि ज्ञानका विषय होता है। अर्थात् पूर्वमे उत्पन्न
अपने ही ज्ञानका बादमें अपनेको ही स्मरण आदि होता है। अत
ज्ञानके परतोग्राह्य होनेमें कोई अनुपपत्ति नहीं है।
यदि ज्ञानमे स्वकर्मत्व (स्वविषयत्व) सिद्ध करो तो छिदा आदि
सभी दृष्टान्तभूत क्रियायें स्वविषयत्वरूप साध्यसे बाधित हैं - - -